मनोरंजन फ़िल्मो में प्रयोग होती कनपुरिया लफ़्फ़ाज़ी

फ़िल्मो में प्रयोग होती कनपुरिया लफ़्फ़ाज़ी

– अकरम क़ादरी मशहूर कहावत है “ढाई कोस पास पर पानी बदले और ढाई कोस पर वाणी” यह कहावत बिल्कुल सटीक है- क्योंकि कानपुर से…

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राजनीति मृतप्राय किसान आंदोलन को टिकैत के आंसुओं की ‘संजीवनी’

मृतप्राय किसान आंदोलन को टिकैत के आंसुओं की ‘संजीवनी’

सुशील कुमार’नवीन’ बिना ‘जन’ कोई भी जन आंदोलन कामयाब नहीं हो सकता। ये ‘जन’ ही तो हैं जो हर वक्ता को बेबाक बोलने का,निर्भीक हो…

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राजनीति आंदोलन की सफलता व जनसमर्थन के लिए वांमपंथी और राजनैतिक विचारधारा के लोगों को आंदोलन से भगाना जरूरी

आंदोलन की सफलता व जनसमर्थन के लिए वांमपंथी और राजनैतिक विचारधारा के लोगों को आंदोलन से भगाना जरूरी

भगवत कौशिक किसान आंदोलन के नाम पर देश की राजधानी दिल्ली मे हुए बवाल के बाद पूरे देश मे एक सवाल खडा हो गया है…

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धर्म-अध्यात्म हमें जीवात्मा के आवागमन तथा इसकी दुःखों से मुक्ति का ज्ञान होना चाहिये

हमें जीवात्मा के आवागमन तथा इसकी दुःखों से मुक्ति का ज्ञान होना चाहिये

–मनमोहन कुमार आर्य                मनुष्य का आत्मा अभौतिक पदार्थ है। आत्मा से इतर मनुष्य का शरीर भौतिक पदार्थों से बना होता है। मनुष्य शरीर को…

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कविता हारा-थका किसान !

हारा-थका किसान !

बजते घुँघरू बैल के, मानो गाये गीत ! चप्पा चप्पा खिल उठे, पा हलधर की प्रीत !! देता पानी खेत को, जागे सारी रात !…

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कविता बापू की पुण्यतिथि पर

बापू की पुण्यतिथि पर

बापु तुम्हारी पुण्यतिथि पर तुमको क्या मै बताऊं,आज तिरंगा रो रहा है किस किस को मै समझाऊं । नाम किसानों का लेकर ये झंडा खालिस्तानी…

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कविता विदाई

विदाई

आँसुओं के संग जबहोती है ठठोलीमुश्किल है समझनातब नैनों की बोली पिता दिखता है परेशानमाँ लगती है बेचैनबहन दिनभर हँसती हैरोती है सारी रैन भाई…

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व्यंग्य हे भाय ! कम्बल है कि पद्मश्री सम्मान…?

हे भाय ! कम्बल है कि पद्मश्री सम्मान…?

                     प्रभुनाथ शुक्ल भगवान ने ठंड और गरीबों की जोड़ी काफी शोध के बाद बनाई है।…

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राजनीति आँसुओं की दो बूँद बन गया सैलाब!

आँसुओं की दो बूँद बन गया सैलाब!

देश के सामने एक नया सवाल आकर खडा हो गया। क्या किसानों को एक नया जुझारू नेता मिल गया। क्या किसानों को फिर अपनी जुबान…

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बच्चों का पन्ना साली

साली

होता है वो आदमीबहुत भाग्यशालीनसीब होती है जिसेससुराल में साली लगे ग्रीष्म ऋतु मेंजैसे शीतल पवनवैसी ही लगती हैवामांगी की बहन कुरूप व्यक्ति को भीकहती…

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आर्थिकी विकास की रफ़्तार तेज़ करने हेतु राजस्व में कमी के बावजूद पूंजीगत ख़र्चे बढ़ा रही है केंद्र सरकार

विकास की रफ़्तार तेज़ करने हेतु राजस्व में कमी के बावजूद पूंजीगत ख़र्चे बढ़ा रही है केंद्र सरकार

पूरे विश्व में फैली कोरोना महामारी के चलते सभी देशों में तुलनात्मक रूप से राजस्व संग्रहण में बहुत कमी आई है। भारत में भी यही…

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कविता फिर क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून?

फिर क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून?

—–विनय कुमार विनायकनदी-पहाड़-झील-झरने-पौधे और खूनक्या हम बना सकते? भगीरथ से पूछो जिसने बीड़ा उठाया थाएक हरकुलियन टास्क गंगा बनाने कापर क्या बना पाया था उन्होंने…

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