राजनीति नीति का दमन या नियति का दिखावा

नीति का दमन या नियति का दिखावा

-अनिल अनूप दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में बीते दो माह से दिया जा रहा जो धरना लाखों लोगों की नाक में दम किए हुए…

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लेख उर्दू सिर्फ मुसलमानों की भाषा नहीं है.

उर्दू सिर्फ मुसलमानों की भाषा नहीं है.

     · डॉ. अमरनाथ इधर उर्दू को मुसलमानों की भाषा के रूप में रेखांकित करने का चलन बढ़ा है. यह गलत अवधारणा है. कोई भी…

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राजनीति अमेरिका के साथ डेयरी उत्पाद समझौते से बचने की जरूरत

अमेरिका के साथ डेयरी उत्पाद समझौते से बचने की जरूरत

प्रमोद भार्गवअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस यात्रा में यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका और भारत के बीच डेयरी, पोल्ट्री व…

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राजनीति राजनीति की नई इबारत लिखने की ओर बिहार

राजनीति की नई इबारत लिखने की ओर बिहार

निर्मल रानी महात्मा बुध से लेकर महात्मा गाँधी जैसे महापुरुषों की कर्मस्थली रहा देश का प्राचीन समय का सबसे समृद्ध राज्य बिहार गत 15 वर्षों में…

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राजनीति अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का कुत्सित रूप कोरोना वायरस

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का कुत्सित रूप कोरोना वायरस

आज जब एशिया के एक देश चीन के एक शहर वुहान से कोरोनानामक वायरस का संक्रमण देखते ही देखते जापान,जर्मनी,अमेरिका,फ्रांस, कनाडा,रूस समेत विश्व के 30 से अधिक देशों में फैल जाता है तो निश्चित ही  वैश्वीकरण…

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पर्व - त्यौहार राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के प्रतीक हैं शिव

राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के प्रतीक हैं शिव

महाशिवरात्रि (21 फरवरी) पर विशेष – योगेश कुमार गोयल             भारत में सर्वाधिक महत्व जिस देव का है, वो देवाधिदेव भगवान शिव ही हैं, जो…

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वर्त-त्यौहार शिव के अर्धनारीश्वर रूप का यथार्थ

शिव के अर्धनारीश्वर रूप का यथार्थ

21 फरवरी शिवरात्रि पर्व पर विशेष प्रमोद भार्गव पुराणों में शिव की कल्पना ऐसे विशिष्ट व्यक्ति के रूप में की गई है, जिनका आधा शरीर…

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कविता आदमी की कोई हद न रही

आदमी की कोई हद न रही

जाने ये क्‍या हद हो गयी ? कि आदमी की हद सरहदों में खो गयी सरहद बना ये आदमी,आदमी है कहाँ खोखला उसका वजूद और…

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कविता दान…

दान…

उतारो उतारो आज तुम जिस्‍म से अपनी खूबसूरत आत्‍मा का यह गहना उठो दुआयें देकर यमराज को, यह आत्‍मा दान दे दो। बनाकर भेजी थी…

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कविता पहनी है धरती ने ज्‍योति की पायल

पहनी है धरती ने ज्‍योति की पायल

आज आसमाँ से ये जाकर कह दे कोई सितारों की महफिल कहीं और सजायें। पहनी है धरती ने ज्‍योति की पायल, दीपों के घुंघरू, स्‍वर…

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कविता खाली हाथ

खाली हाथ

सारी रात नींद आँखों से कोसों दूर है ख्‍यालों का पुलिंदा मधुर पल की चाह में एक पल के लिये जीने को उत्‍सुक है। नितांत…

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कविता जो करना है अभी करें, आज के दिन

जो करना है अभी करें, आज के दिन

दिल में नये अरमान बसायें,आज के दिन। दिल को गूंचे की तरह खिलायें, आज के दिन॥ फूलों की तरह हँसे-हँसायें, आज के दिन। बादल की…

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