आरक्षण

आरक्षण का भूत

जहां तक आरक्षण के बारे में संघ का दृष्टिकोण है, तो इस बारे में तो संघ के किसी अधिकृत व्यक्ति की बात ही माननी होगी। संघ के सहसरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होस्बले का बयान इस बारे में आया भी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक जाति, जन्म और क्षेत्रगत असमानताएं हैं, तब तक आरक्षण जरूरी है; लेकिन इस बयान के बावजूद वे विघ्नसंतोषी लोग शांत नहीं हुए हैं, चूंकि उनका उद्देश्य समानता लाना नहीं, बल्कि चुनाव में भा.ज.पा. को हराना है।

आरक्षण नीति का संवैधानिक प्रावधान

डा राधेश्याम द्विवेदी सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों