संघ

जम्मू-कश्मीर, लौहपुरुष और संघ 

पाकिस्तान नेयुद्ध का सहारा लेकर कबाइलियोंको कश्मीर पर आक्रमण करने के लिए उकसाना शुरू कर दिय​|​अब महाराजा खुद को बड़ी मुश्किल में फंसा हुआ पा रहे थे ​|
ऐसे नाजुक दौर में महाराजा की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघसामने आया और महाराज को यह समझाने का सफल प्रयास किया कि भारत केसाथ राज्य का विलय करने में भी उनकी और राज्य की जनता की भलाई है।राज्य की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी।सरदार पटेल और महात्मा गांधी ने भीमहाराजा को मनाने का प्रयास किया, पर महाराजा नेहरू की अधिसत्ता को माननेके लिए तैयार नहीं थे।

क्या गलत कहा संघ ने ?

सर्वविदित है कि जब लम्बे समय से शोषण और गुंडागर्दी का शिकार रही राष्ट्रवादी विचारधारा वाली सरकार सत्ता में आई है तो इस तरह की वैचारिकता रखने वाले असंख्य लोगों जिसमे की तमामं कार्यकर्ता भी शामिल हैं में व्यावस्थासुधार को लेकर अतिउत्साह का वातावरण है। ऐसी स्थिति में सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप की सम्भावनाये भी बढ़ जाती हैं, आगरा लखनऊ , आदि शहरों में हुईं घटनाएं इसी का परिणाम कही जा सकती हैं।

संघ, संघ परिवार और भाजपा के मूल में ही दलितोन्मुखी विचारधारा का प्रतिक्रियावादी विरोध

अजीब विडम्बना है …. आजादी के लगभग सात दशकों के बाद भी, सामाजिक कुरीतियों और विषमताओं