Tag: भारत

शख्सियत समाज

भारत में सामाजिक क्रांति के संवाहक :- डा. अंबेडकर

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1941 से 1945 के बीच उन्होंने अत्यधिक संख्या में विवादास्पद पुस्तकें लिखीं और पर्चे प्रकाशित किये। जिसमें थाट आफ पाकिस्तान भी शामिल है। यह डा. अम्बेडकर ही थे जिन्होनें मुस्लिम लीग द्वारा की जा रही अलग पाकिस्तान की मांग की कड़ी आलोचना व विरोध किया। उन्होनें मुस्लिम महिला समाज में व्याप्त दमनकारी पर्दा प्रथा की भी निंदा की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे रक्षा सलाहकार समिति और वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए श्रममंत्री के रूप में भी कार्यरत रहे। भीमराव को विधिमंत्री भी बनाया गया।

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समाज

बदलते भारत में बदलती शिक्षा

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उच्च शिक्षा के संबध में लोगो की राय जानने के लिए दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन चरखा ने कुछ छात्रों से बात की। इस संबध में जम्मू विश्वविद्यालय के छात्र जफर कहते हैं कि "विश्वविद्यालय में एडमिशन के बारे पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है। उनके पास जानकारी नहीं है कि कब प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है। हालांकि सरकार कई योजनाएं लाती है, लेकिन छात्रों को इन योजनाओं के बारे में सूचित करने का कोई रास्ता नहीं है। जम्मू जैसे क्षेत्र में कभी कभी सूचना इतनी देर से पहुंचती है कि छात्र उसके लाभ से वंचित रह जाते है”।

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विविधा

दम तोड़ती भारत की जीवित जीवनदायिनी मैया यमुना

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इसका बड़ा कारण यह है कि दिल्ली के करीब 50 फीसद इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है। जल बोर्ड के सीवरेज शोधन संयंत्रों की क्षमता करीब 604 एमजीडी है, लेकिन प्रतिदिन करीब 450 एमजीडी सीवरेज शोधित हो पाता है। जल बोर्ड ने 1962 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर सीवर लाइन का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू कराया था। अभी तक इसका एक पैकेज पूरा हुआ है। इसके पांच पैकेजों का काम अधूरा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर छोटे नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए 14 सीवरेज शोधन संयंत्र लगाने की योजना बनी थी।

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आर्थिकी विविधा सार्थक पहल

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

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भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!

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