Category: विधि-कानून

खेत-खलिहान लेख विधि-कानून

अधिसंख्य किसान तो खड़ी फसल बेचने को ही मजबूर हैं

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रंजन कुमार सिंहकृषि कानूनों को लेकर माहौल गरम है। लंबे समय से किसान दिल्ली को घेरे बैठे हैं और दिल्ली उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। मैं कोई विधिवेत्ता तो हूं नहीं कि इस विवादास्पद अधिनियम के वैधानिक पहलुओं पर अपनी कोई राय दे सकूं, पर कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां जो मुझे सूझ पड़ती हैं, […]

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आर्थिकी राजनीति विधि-कानून

नए श्रम क़ानूनों के लागू होने से देश के आर्थिक विकास को लग सकते हैं पंख

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किसी भी संस्थान की सफलता में उसके मज़दूरों एवं कर्मचारियों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहता है। बिना मज़दूरों एवं कर्मचारियों के सहयोग के कोई भी संस्थान सफलता पूर्वक आगे नहीं बढ़ सकता। इसीलिए संस्थानों में कार्य कर रहे मज़दूरों एवं कर्मचारियों को “मज़दूर/कर्मचारी शक्ति” की संज्ञा दी गई है। हमारे देश में दुर्भाग्य से […]

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