राजनीति विधि-कानून न्यायिक व्यवस्था में मिसाल बनेंगे न्यायमूर्ति रमना! April 11, 2021 / April 11, 2021 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment कई महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर चर्चित रहे हैं जस्टिस रमना– योगेश कुमार गोयलमहामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की स्वीकृति के बाद न्यायमूर्ति नथालापति वेंकट रमना भारत के 48वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) होंगे। 64 वर्षीय जस्टिस रमना 24 अप्रैल को देश के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। दरअसल मौजूदा मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े का कार्यकाल […] Read more » Justice Ramna न्यायमूर्ति रमना
लेख विधि-कानून सेना में महिलाओं के हक पर कोर्ट की सख्ती March 27, 2021 / March 27, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग –हमारी सेनाओं में भी महिलाओं के साथ भेदभाव, दोयम दर्जा एवं बेचारगी वाला नजरिया दुर्भाग्यपूर्ण एवं असंगत है। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2020 में दिए अपने फैसले के बावजूद सेना में कई महिला अधिकारियों को फिटनेस, अन्य योग्यताओं और शर्तों को पूरा करने के बावजूद स्थायी कमीशन नहीं दिए जाने को गलत, भेदभावपूर्ण […] Read more » Courts strictness on the rights of women in the army rights of women in the army सेना में महिलाओं के हक
लेख विधि-कानून अदालतों में अंग्रेजी की गुलामी March 13, 2021 / March 13, 2021 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत की न्याय-प्रणाली के बारे में ऐसी बातें कह दी हैं, जो आज तक किसी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने नहीं कही। वे जबलपुर में न्यायाधीशों के एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कानून, न्याय और अदालतों के बारे में इतने पते की बातें यों ही नहीं […] Read more » Slavery of english in courts अदालतों में अंग्रेजी की गुलामी भारत की न्याय-प्रणाली राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
लेख विधि-कानून सवालों से घिरती न्याय-व्यवस्था और न्यायिक नियुक्ति आयोग की आवश्यकता March 13, 2021 / March 13, 2021 by प्रो. रसाल सिंह | Leave a Comment -प्रो. रसाल सिंह पिछले दिनों भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने न्याय-व्ययवस्था को ‘जीर्ण-शीर्ण’ कहकर सनसनी पैदा कर दी हैI उन्होंने यह भी कहा है कि जो व्यक्ति न्याय की आस में न्यायालय जाता है, वह अपने निर्णय पर प्रायः पश्चाताप करता हैI न्याय-व्यवस्था के शीर्ष पर रहे व्यक्ति का यह […] Read more » justice Gogoi The need for judicial system and judicial appointment commission surrounded by questions न्यायिक नियुक्ति आयोग की आवश्यकता सवालों से घिरती न्याय-व्यवस्था
आलोचना विधि-कानून जातीय आरक्षण के दिन लद गए March 12, 2021 / March 12, 2021 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिकहमारा सर्वोच्च न्यायालय अब नेताओं से भी आगे निकलता दिखाई दे रहा है। उसने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे बताएं कि सरकारी नौकरियों में जो आरक्षण अभी 50 प्रतिशत है, उसे बढ़ाया जाए या नहीं? कौन राज्य है, जो यह कहेगा कि उसे न बढ़ाया जाए? सभी नेता और पार्टियाँ […] Read more » Supreme Court supreme court on reservation The days of ethnic reservation are over जातीय आरक्षण
विधि-कानून लौटा दो विष्णु की जिंदगी के बीस साल…? March 10, 2021 / March 10, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी की न्याय की उम्मीद क्या खत्म होती दिखती है। व्यक्ति के संविधानिक और कानूनी अधिकार क्या संरक्षित नहीं रह गए हैं। कानून और संविधान की किताबें सिर्फ दिखावटी हैं। क्या कानून अपने दायित्वों और कर्तब्यों का निर्वहन पारदर्शिता से कर रहा है ? न्याय के अधिकार का क्या संरक्षण हो […] Read more » इंसाफ की उम्मीद में विष्णु तिवारी विष्णु की जिंदगी
लेख विधि-कानून भारत मे मदरसा शिक्षा का औचित्य February 25, 2021 / February 25, 2021 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप जब से मानव सभ्यता का सूर्य उदय हुआ है तभी से भारत अपनी शिक्षा तथा दर्शन के लिए प्रसिद्ध रहा है। यह सब भारतीय शिक्षा के उद्देश्यों का ही चमत्कार है कि भारतीय संस्कृति ने संसार का सदैव पथ-प्रदर्शन किया और आज भी जीवित है। वर्तमान युग में भी महान दार्शनिक एवं शिक्षा […] Read more » Justification of madrasa education in India भारत मे मदरसा शिक्षा का औचित्य
लेख विधि-कानून पॉक्सो की व्याख्या बनाम न्याय-प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न February 4, 2021 / February 4, 2021 by प्रो. रसाल सिंह | Leave a Comment -प्रो. रसाल सिंहबॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ द्वारा पिछले दिनों 2016 में दर्ज एक मामले में दिए गए निर्णय ने न सिर्फ संबंधित न्यायाधीश की न्यायिक समझ; बल्कि पूरी की पूरी न्याय-प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैंI अपने इस अत्यंत विवादस्पद और असंवेदनशील निर्णय में नागपुर एकल पीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा […] Read more » POCSO Act न्याय-प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न पॉक्सो की व्याख्या
राजनीति विधि-कानून भारत का संविधान सबको सामान अधिकार देता है January 25, 2021 / January 25, 2021 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment गणतंत्र दिवस हर वर्ष जनवरी महीने की 26 तारीख को पूरे देश में देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर मनाया जाता है। भारत के लोग हर साल 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि 26 जनवरी को ही 1950 में भारतीय संविधान को एक लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ भारत देश में लागू […] Read more » Constitution of India gives equal rights to all भारत का संविधान
लेख विधि-कानून भारतीय संविधान से जुड़े रोचक तथ्य January 24, 2021 / January 24, 2021 by श्वेता गोयल | Leave a Comment – श्वेता गोयलभारतीय संविधान को वैसे तो 26 नवम्बर 1949 को स्वीकृत कर लिया गया था किन्तु संविधान लागू हुआ था 26 जनवरी 1950 को। इसी उपलक्ष्य में तभी से प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक प्रयासों के कारण ही भारत का संविधान ऐसे रूप में सामने […] Read more » Interesting facts related to Indian Constitution भारतीय संविधान
विधि-कानून विविधा विकलांग सिस्टम की भेंट चढ़ते निर्दोष मासूम ? January 18, 2021 / January 18, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment पिछले दिनों महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में 10 मासूम नवजात बच्चों की मौत एक इत्तेफ़ाक नहीँ है, यह हमारे नाकामयाबिल व्यवस्था का सबसे नक्कारा उदारहण है। राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार ने घटना की निष्पक्ष जाँच का आदेश दिया है। पीड़ित परिवारों को पाँच- पाँच लाख रुपए का मुआवज़ा भी मिलेगा। हम कह भी […] Read more » तमिलनाडू में कुंभकोणम में हादसा भंडारा जिला अस्पताल में 10 मासूम नवजात बच्चों की मौत
राजनीति विधि-कानून सुप्रीमकोर्ट ने सरकार की बढ़ाई मुश्किलें? January 12, 2021 / January 12, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल किसान आंदोलन पर सुप्रीमकोर्ट ने सरकार को खरी- खरी सुनाई है। अदालत की यह तल्खी और नाराजगी सरकार की सांसत बढ़ा दिया है। अदालत ने सरकार की नाकामियों को लेकर जिस तरह की लताड़ लगाई सरकार को उसकी उम्मीद नहीँ रही होगी। अदालत […] Read more » Supreme court increased the difficulties for the government? supreme court on kisan andolan सुप्रीमकोर्ट