समाज डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड December 20, 2013 / December 20, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड काली कान्त झा इक्सवीं सदी के भारत में आज जहाँ देशवासी दिन प्रतिदिन नित्य नए आयाम को छु रहे है वही झारखण्ड आज भी विभिन्न प्रकार की कुरीतियों से जूझ रहा है | झारखण्ड को बने लगभग १३ साल हो गए है लेकिन आज भी डायन कुप्रथा के नाम पर औरतो खास कर विधवाओ को […] Read more » डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड:-
समाज लालबत्ती पर न्यायालय की लगाम December 18, 2013 / December 18, 2013 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक यह स्वागतयोग्य है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने वाहनों पर लालबत्ती और सायरन के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति सी नागप्पा की पीठ ने लालबत्ती के दुरुपयोग रोकने वाली याचिका पर फैसला देते हुए कहा है कि सिर्फ उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों […] Read more » लालबत्ती पर न्यायालय की लगाम
समाज दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है December 18, 2013 / December 18, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है पिछले कुछ दशकों पहले साहित्य के अथाह, असीम सागर में एक ऐसा बवंडर-तूफान आया, जिससे अबतक से सारे मापदंड तहेस-नहेस हो गए | उसने अपना स्थान सम्पूर्ण विश्व सहित्य के पटल पर नीले अक्षरों से अंकित कर दिया | वह था, परम्परागत साहित्य में जन्मा मैला, कुचैला, उपेक्षित, […] Read more » दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है
समाज अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा December 18, 2013 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 1 Comment on अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा सुरेश हिन्दुस्थानी भारत जैसे देश में अप्राकृतिक कृत्य का समर्थन करना निश्चित ही भारतीयता को तार तार करने का षडयंत्र है, भारत एक सांस्कृतिक देश है, जहां अनेक संस्कार हैं। पूरा जीवन इन्हीं संस्कारों के साए में आगे बढ़ता है लेकिन जब हम संस्कारों को भूलकर कुसंस्कारों की ओर बढ़ते हैं तब निश्चित ही भारत […] Read more » अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा
समाज असमानता के धरातल पर बसा शहरी गरीब लोक December 17, 2013 / December 17, 2013 by संजय कुमार | Leave a Comment संजय सिंह एक तरफ पंचसितारा संस्कृति में पलते बच्चे हैं तो दूसरी तरफ 10/10 के झुग्गियों मे सिसकता बचपन। अमीर और गरीबों के बीच आवासीय स्थितियों और सामाजिक नजरिये को देखें तो एक बड़ा निर्मम विभाजन दिखाई देता है । जबकी दोनो ही वर्गों के लोग एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों की आजीविका […] Read more » असमानता के धरातल पर बसा शहरी गरीब लोक
समाज समलैंगिकों के समर्थन का मतलब समलैंगिक होना नहीं December 16, 2013 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी आईपीसी की धारा 377 को निरस्त करना इतना आसान नहीं है! एल जी बी टी यानी लेस्बियन,गे, बायोसैक्सुअल और ट्रांस्जेंडर जिनको हिंदी में हम समलैंगिक के नाम से जानते हैं चार तरह के लोग पाये जाते हैं। लेस्बियन यानी महिला के महिला से अंतरंग संबंधगे यानी पुरूष के पुरूष के रिश्ते, […] Read more » समलैंगिकों के समर्थन का मतलब समलैंगिक होना नहीं
समाज सोनिया कांग्रेस के लिये देश में प्रमुख मुद्दा समलैंगिकता है December 15, 2013 / December 15, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री सोनिया कांग्रेस की हाल ही में , पांच राज्यों की विधानसभाओं के लिये चुनावों में जबरदस्त हार हुई है । केवल हार ही नहीं , दिल्ली राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो उसका सूपडा ही साफ हो गया है । थोडी बहुत लाज मिजोरम में चर्च ने बचा दी , अन्यथा […] Read more » Homosexuality मुद्दा समलैंगिकता समलैंगिकता
समाज मल्लिका, शहज़ादा और समलैंगिकता December 14, 2013 / December 14, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 6 Comments on मल्लिका, शहज़ादा और समलैंगिकता समलैंगिक संबन्धों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ़ एक बार सारी अनैतिक शक्तियां एकजूट हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को विवादास्पद बनाने की मुहीम में समलैंगिकों के साथ मल्लिका-ए-हिन्दुस्तान, शहज़ादा-ए-हिन्दुस्तान और दिल्ली के बेताज़ बादशाह भी शामिल हो गये हैं। नीचे पेश है, उनके वक्तव्य – ‘दिल्ली हाईकोर्ट के […] Read more »
समाज समलैंगिकः कुदरत के अपराधियों को सजा ? December 14, 2013 / December 14, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर’’शादाब’’ भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने जो समलैंगिक संबंधों के संदर्भ में अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार इस प्रकार के संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई इस तरह के आरोप में लिप्त पाया जाता है तो उसे उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। गौरतलब है […] Read more » समलैंगिक
समाज समलैंगिक संबंध-मर्यादा व नैतिकता के आईने में December 12, 2013 by निर्मल रानी | 2 Comments on समलैंगिक संबंध-मर्यादा व नैतिकता के आईने में निर्मल रानी दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2009 में जिस समय समलैंगिक संबंधों को वैध कऱार देने संबंधी एक याचिका पर निर्णय सुनाते हुए इसे वैध ठहराया था उस समय भी देश में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। गौरतलब है कि 2001 में समलैंगिक संबंधों को वैध ठहराने हेतु ऐसे संबंधों की […] Read more » समलैंगिकता
महत्वपूर्ण लेख समाज क्या, हमारा नामो-निशां मिट जाएगा ? December 12, 2013 / December 12, 2013 by डॉ. मधुसूदन | 6 Comments on क्या, हमारा नामो-निशां मिट जाएगा ? डॉ. मधुसूदन कुटुम्ब संस्था की समाप्ति ही, यूनान और रोम की संस्कृतियाँ मिटाने का एक मूल (?) कारण माना जाता है। यदि हम भी उसी मार्ग पर चले तो फिर हमारा नामो-निशां भी अवश्य मिट जाएगा। आज-कल भारत में, बलात्कार के समाचार कुछ अधिक पढ रहा हूँ, इसलिए, विचारकों और हितैषियों के समक्ष अमरिका के इतिहास […] Read more »
शख्सियत समाज गुरु तेग बहादुर सिमरिए… November 24, 2013 / November 24, 2013 by परमजीत कौर कलेर | Leave a Comment परमजीत कौर कलेर 24 november 2013 शहीदी दिवस विशेष धरम हेत साका कीआ …सीस दीआ पर सिरड न दीआ…जी हां बलिदान त्याग की मूर्त …नौवे गुरू साहिब श्री गुरू तेग बहादुर जी…जिन्होंने देश और धर्म की खातिर अपने प्राणों को न्यौछावर […] Read more » गुरु तेग बहादुर