विविधा मेहताब (चाँदनी) बाग आगरा की खासियत April 22, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment हाल ही में की गई खुदाई से एक विशाल अष्टकोणीय टैंक 25 फव्वारे, एक छोटे से केंद्रीय टैंक और पूर्व में एक बरादरी के साथ सुसज्जित का पता चला। साइट भी काले ताज के मिथक के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन खुदाई के एक उद्यान परिसर के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराई है। नदी के बाँये तट पर ताजमहल के विपरीत दिशा में स्थित बगीचे के परिसर को मेहताब बाग या 'चाँदनी बाग' के नाम से जाना जाता है। पहले Read more » Featured चाँदनी बाग महताब बाग मेहताब
विविधा जानिए चाकू और वास्तु का सम्बन्ध– April 22, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment नुकीले चीजों का नुकीला हिस्सा हमेशा अंदर की ओर ही रखना चाहिए। इससे जहां किसी को चोट या कट लगने की संभावनाएं कम हो जाती हैं वहीं कई अन्य फायदे भी हैं। नुकीला हिस्सा बाहर रखने पर वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा को बल मिलता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो जाता है। इससे परिवार के सदस्यों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से नुकीला हिस्सा हमेशा अंदर की ओर रखना चाहिए और चाकू या कैंची जैसे धारदार औजार बच्चों की पहुंच से दूर रखने चाहिए। Read more » know the relation of kitchen knives and vastu vastu of kitchen knives चाकू और वास्तु
विविधा ‘नोटबंदी’ के बाद ‘बत्ती बंदी’ यानी बड़ा फैसला… April 22, 2017 / April 28, 2017 by अजय जैन ' विकल्प ' | Leave a Comment अब बात करें राज्य सरकारों की तो, केन्द्र की भांति राज्य सरकार इस पर फैसला खुद लेगी,लेकिन माना जा रहा है कि केन्द्रीय फैसले के बाद राज्यों पर इसे लागू करने का दबाव रहेगा। दरअसल खासकर भाजपा शासित राज्यों पर इसका सीधा असर आएगा। हालांकि,पहले बहुत सारे मंत्री 'लालबत्ती' होने के पक्ष में बयान देते रहे हैं,तो अब इसे छोड़ने से उनके दिल में कसक तो रहेगी,पर इसे जनहित में सही समय पर लिया गया स्वस्थ निर्णय मानना इनकी भी मजबूरी है। यदि फैसले की खिलाफत की तो सम्भव है कि,पीएम ऐसे मंत्रियों को पुराने नोट की तरह अनुपयोगी कर दें। Read more » Featured नोटबंदी फैसला बत्ती बंदी
विविधा क्या सचमुच ईश्वर/प्रभु/भगवान/अल्लाह की आराधना करने के लिए लाउडस्पीकर पर चिल्लाने की जरुरत होती हैं ?? April 21, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment मैं नास्तिक नही हूं लेकिन मेरा धर्म को लेकर किसी भी तरह की मॉब प्रैक्टिस (भीड़ में प्रार्थना) में भरोसा नहीं है। सोनू निगम को ट्विटर पर ट्रेंड करते देख कर लगा कि शायद कोई नया म्यूजिक अलबम आया है। लेकिन जब चेक किया तो पता चला उन्होंने मेरी दुखती रग पर हाथ रख दिया […] Read more » Featured Sonu Nigam on loud speakers अल्लाह की आराधना करने के लिए लाउडस्पीकर ईश्वर के लिए लाउडस्पीकर प्रभु के लिए लाउडस्पीकर भगवान के लिए लाउडस्पीकर लाउडस्पीकर
विविधा उत्तराखंड में जल संकट :चुनोतियाँ व समाधान की दिशा में प्रयास April 21, 2017 by प्रदीप रावत | Leave a Comment वास्तव में पेयजल संकट आगामी भविष्य के लिए एक चुनोतिपूर्ण विषय है । इस जटिल समस्या के निवारण के लिए हमें केवल सरकारी नीतियों के भरोशे न बैठकर जनता को भी जागरूक करना होगा जिससे हम प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस मूल्यवान संसाधन को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए संजोकर रख पाएं। गाँवो से शहरो की तरफ होने वाले तीव्र पलायन के कारण शहरो पर अतरिक्त जनसंख्या दवाब बढ़ रहा है इस जनसंख्या दवाब के कारण शहरो में पेयजल की किल्लत साफ़ नज़र आती है । उत्तराखंड के अनेक इलाके ऐसे है जहाँ पानी भरने के लिए लोगो को घण्टों भर लाइन में रहना पड़ता है यह समस्या केवल शहरो में ही नही बल्कि उत्तराखंड के अनेक पहाड़ी गाँवो की भी है जहा आज भी महिलाए किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाकर अपनी आवश्यकताओ को पूरा करती है । Read more » Featured rain water conservation rain water harvesting water crisis in India उत्तराखंड उत्तराखंड में जल संकट जल संकट वर्षा जल संरक्षण
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना-7 April 21, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment नैतिक मूल्यों के आधार बनाकर भी गांधीवाद का एक धूमिल चित्र भारत में गांधीवादियों ने खींचने का प्रयास किया है। गांधीजी भारतीय राजनीति को धर्महीन बना गये। वह उसे संप्रदाय निरपेक्ष नहीं बना सके, अपितु उसे इतना अपवित्र करन् दिया है कि वह सम्प्रदायों के हितों की संरक्षिका सी बन गयी जान पड़ती है। इससे भारतीय राजनीति पक्षपाती बन गयी। जहां पक्षपात हो वहां नैतिक मूल्य ढूंढऩा 'चील के घोंसले में मांस ढूढऩे के बराबर' होता है। नैतिक मूल्य, नीति पर आधारित होते हैं नीति दो अक्षरों से बनी है-नी+ति। जिसका अर्थ है एक निश्चित व्यवस्था। नीति निश्चित व्यवस्था की संवाहिका है, ध्वजवाहिका है और प्रचारिका है। Read more » Featured Gandhiwad gandhiwad ki parikalpana गाँधीजी गाँधीवाद गांधीवाद की परिकल्पना धर्मनिरपेक्षता
जन-जागरण विविधा ध्वनि प्रदूषण न हिन्दू न मुस्लिम,केवल हानिकारक April 20, 2017 by निर्मल रानी | Leave a Comment धर्मस्थलों पर नियमित रूप से निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार होने वाले इस शोर-शराबे से लगभग पूरा देश दु:खी है। ध्वनि प्रदूषण बच्चों की पढ़ाई खासतौर पर परीक्षा के दिनों में उनकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत बाधक साबित होता है। मरीज़ों तथा वृद्ध लोगों के लिए ध्वनि प्रदूषण किसी मुसीबत से कम नहीं। आए दिन होने वाले जगराते,कव्वालियां या दूसरे शोर-शराबे से परिपूर्ण धार्मिक आयोजन यह सब हमारे समाज के स्वास्थय पर बुरा असर डालते हैं। Read more » Featured noise pollution on Azaan Sonu Nigam
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना-6 April 20, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment ''जब सिद्घांत का प्रश्न होता था, तब गांधीजी हिंदुओं की भावनाओं का रंचमात्र भी ध्यान रखे बिना अत्यंत दृढ़ रहते थे, परंतु मुसलमान यदि उसी सिद्घांत का उल्लंघन करें, तो वह बहुत नरमी बरतते थे। मुझे यह बात किसी तरह समझ नहीं आती थी कि अपने देश में करोड़ों लोगों को अपनी नग्नता ढांपने के साधन (कपड़ों) से वंचित करने और उन्हीं कपड़ों को एक दूरस्थ देश तुर्की भेज देने में गांधीजी की ऐसी कौन सी नैतिकता थी?'' Read more » गाँधीवाद गांधीवाद की परिकल्पना भारतीय लोकतंत्र स्वामी श्रद्घानंद
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना- 5 April 20, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीजी को लोकतंत्र का प्रबल समर्थक भी कहा जाता है। उनके चहेते शिष्य जवाहरलाल ने इस बात का बहुत बढ़-चढक़र प्रचार किया। जबकि उस समय की परिस्थिति गत साक्ष्य यह सिद्घ कर रहे हैं कि गांधीजी का लोकतंत्र में नही अपितु अधिनायकवाद में दृढ़ विश्वास था। अब संक्षिप्त चर्चा इस पर करते हैं। भारतीय समाज में ऐसे व्यक्ति को बुद्घिमान माना जाता है जो देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार उचित निर्णय लेने में सक्षम और समर्थ होता है तथा अपने कार्य को निकालने में सफल होता है। गांधीजी भारतीय समाज व संस्कृति के इस तात्विक सिद्घांत को पलट देना चाहते थे। Read more » Featured असहयोग आंदोलन गाँधीजी गाँधीवाद लोकतंत्र सदगुरू रामसिंह ने प्रारंभ किया असहयोग आंदोलन
विविधा सस्ती एवं जेनेरिक दवाओं के लिए कानून April 19, 2017 / April 28, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव महंगी दवाओं के चलते इलाज न करा पाने वाले लाखों गरीब मरीजों के लिए यह खुश खबरी है, कि नरेन्द्र मोदी सरकार एक ऐसे कानून को बनाने जा रही हैं, जिसके बाद चिकित्सक पर्चे पर जेनेरिक दवाएं लिखने को मजबूर हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा एक निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह […] Read more » Featured एनपीपीए जेनेरिक दवाएं राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण
विविधा राम बाग के इतिहास का रहस्य April 19, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment विशेष स्वच्छ भारत अभियान सम्पन्न डा. राधेश्याम द्विवेदी रामबाग यमुना नदी के बायें तट पर स्थित है। इसे आराम बाग और बाग-ए-गुल अफसान के नाम से भी जाना जाता है। राम बाग की अवधारणा और निर्माण भारत में पहले मुगल बादशाह बाबर ने 1528 में करवाया था। यह चीनी का रोजा से 500 मीटर, एतमादुद […] Read more » राम बाग
विविधा गरीबों के हित में दवा नीति का बनना April 19, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment नामी-गिरामी कंपनियों की दवाओं की कीमत काफी अधिक होती हैं। जबकि उन्हीं रासायनिक सम्मिश्रणों वाली दवाएं अगर जेनरिक श्रेणी की हों तो वे काफी कम कीमत में मिल सकती हैं। ये दवाएं वैसा ही असर करती हैं जैसा ब्रांडेड दवाएं। समान कंपोजीशन यानी समान रासायनिक सम्मिश्रण होने के बावजूद इनके निर्माण पर बहुत कम खर्च आता है। इनके प्रचार-प्रसार पर बेहिसाब धन भी नहीं खर्च किया जाता, इसलिए भी इनकी कीमतें काफी कम होती हैं। लेकिन दवा बाजार पर निजी कंपनियों के कब्जे का जो पूरा संजाल है, उसमें जेनरिक दवाओं की उपलब्धता इतनी कम है कि उसका लाभ बहुत-से जरूरतमंद लोग नहीं उठा पाते। Read more » Featured जेनरिक दवा कारोबार स्वास्थ्य देखभाल नीति