राजनीति अब यही रह गई है कांग्रेस के राजनीति की आदत 

अब यही रह गई है कांग्रेस के राजनीति की आदत 

अनिल अनूप  कांग्रेस की ओर से एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी गई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने एक सार्वजनिक बयान…

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राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का विकल्प…. 

राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का विकल्प…. 

अनिल अनूप  भाजपा सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के ही सहारे है, बेशक वह करोड़ों के काडर की पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बूते 2019…

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व्यंग्य बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!!

बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!!

तारकेश कुमार ओझा कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम।…

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साहित्‍य ‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’

‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’

मनमोहन कुमार आर्य, आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी।…

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धर्म-अध्यात्म ‘सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में शिथिलतायें दूर होनी चाहियें’

‘सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में शिथिलतायें दूर होनी चाहियें’

-मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश एक ऐसा ग्रन्थ रचा है जो ‘भूतो न भविष्यति’ कथन को सार्थक सिद्ध करता है। ऋषि दयानन्द ने…

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समाज हिन्दी आत्मा है भारत की

हिन्दी आत्मा है भारत की

डॉ. मधुसूदन युनो में हिन्दी अटल जी ने, युनो में हिन्दी में, भाषण दे कर इतिहास रचा, उसी अंतराल में मैं म. प्रदेश, अपने ननिहाल…

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कविता उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है

उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है

हमने हर रोज जमाने को नया रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है  वो जो चलते थे,तो शेर…

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साहित्‍य हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा

हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा

ब्रह्मानंद राजपूत, हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ…

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साहित्‍य हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न

हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न

 लोकेन्द्र सिंह सर्वसमावेशी भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं…

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धर्म-अध्यात्म “स्वस्थ, सुखी व दीर्घ जीवन का आधार सन्ध्योपासना व इसके मन्त्रों का अर्थ सहित चिन्तन”

“स्वस्थ, सुखी व दीर्घ जीवन का आधार सन्ध्योपासना व इसके मन्त्रों का अर्थ सहित चिन्तन”

मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जीवन परमात्मा से हम सबको अपनी आत्मा की उन्नति के लिये मिला है। आत्मा की उन्नति का साधन सत्य ज्ञान की…

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कविता ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ !

ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ !

(मधुगीति १८०८१४ अ) ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ, जावहुँ आवहुँ कान्हा भावहुँ; वाल सखा संग प्रीति लगावहुँ, साखन सुरति करहुँ विचलावहुँ ! सावन मन भावन जब आवतु, पावन जल जब वो वरसावत; वँशी की धुनि हौं तव सुनवत, हिय हुलसत जिय धीर न पावत ! झोटा लेवत सखि जब गावत, ब्रह्मानन्द उमगि उर आवत; शीरी वायु गगन ते धावत, ध्यानावस्थित मोहि करि जावत ! श्याम- शाम शीतल सुर करवत, गान बहाय श्याम पहुँचावत; तानन तिरिया पियहिं बुलावत, मात पिता ग्रह अमृत घोलत ! पूछत कुशल भाव बहु भीने, चीन्हे अनचीन्हे सुर दीन्हे; ‘मधु’ माखन गोकुल कौ खावहुँ, मधुवन में मुरली सुनि जावहुँ ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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धर्म-अध्यात्म “मोक्ष प्राप्ति तक मनुष्य जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त नहीं हो सकता”

“मोक्ष प्राप्ति तक मनुष्य जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त नहीं हो सकता”

मनमोहन कुमार आर्य,  हम मनुष्य हैं और हमारा जन्म हुआ है। श्रीमद्भगवद्-गीता का प्रसिद्ध वचन है ‘जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु धु्रवं जन्म मृतस्य च’ अर्थात्…

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