कविता हिन्दी की व्यथा

हिन्दी की व्यथा

डॉ. छन्दा बैनर्जी हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर जहाँ एक ओर हम हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की बात करते हैं, वहीं दबे…

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कविता हिंदी भाषा पर कुछ दोहे

हिंदी भाषा पर कुछ दोहे

हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है,इसका करो विकास  हिन्दी में सब काम करो,ऐसा करो सब प्रयास हिन्दी बोलोगे तो होगा देश का तभी विकास दूसरी भाषा…

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समाज किराए की राहत:किसके हिस्से कितनी

किराए की राहत:किसके हिस्से कितनी

अनिल अनूप  बस किराया बढ़ाकर परिवहन क्षेत्र को कितनी राहत मिलेगी, लेकिन आम जनता अवश्य ही अपने लिए इसे एक अतिरिक्त बोझ मानेगी। काफी अरसे…

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राजनीति अब यही रह गई है कांग्रेस के राजनीति की आदत 

अब यही रह गई है कांग्रेस के राजनीति की आदत 

अनिल अनूप  कांग्रेस की ओर से एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी गई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने एक सार्वजनिक बयान…

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राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का विकल्प…. 

राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का विकल्प…. 

अनिल अनूप  भाजपा सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के ही सहारे है, बेशक वह करोड़ों के काडर की पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बूते 2019…

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व्यंग्य बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!!

बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!!

तारकेश कुमार ओझा कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम।…

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साहित्‍य ‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’

‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’

मनमोहन कुमार आर्य, आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी।…

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धर्म-अध्यात्म ‘सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में शिथिलतायें दूर होनी चाहियें’

‘सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में शिथिलतायें दूर होनी चाहियें’

-मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश एक ऐसा ग्रन्थ रचा है जो ‘भूतो न भविष्यति’ कथन को सार्थक सिद्ध करता है। ऋषि दयानन्द ने…

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समाज हिन्दी आत्मा है भारत की

हिन्दी आत्मा है भारत की

डॉ. मधुसूदन युनो में हिन्दी अटल जी ने, युनो में हिन्दी में, भाषण दे कर इतिहास रचा, उसी अंतराल में मैं म. प्रदेश, अपने ननिहाल…

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कविता उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है

उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है

हमने हर रोज जमाने को नया रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है  वो जो चलते थे,तो शेर…

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साहित्‍य हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा

हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा

ब्रह्मानंद राजपूत, हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ…

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साहित्‍य हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न

हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न

 लोकेन्द्र सिंह सर्वसमावेशी भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं…

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