रोहित वेमुला की जांच के बाद मीडिया पर सवाल

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मीडिया के लिए राष्ट्रीय नीति जरुरी सुरेश हिन्दुस्थानी एक कहावत है कि एक झूंठ को सौ बार प्रचारित किया जाए तो वह लगभग सत्य जैसी ही प्रतीत होने लगती है। सांस्कृतिक वातावरण से कोसों दूर जाने वाली हमारे देश की जनता भी इस झूंठ को सत्य मानने के लिए विवश हो जाती है। इसके परिणाम… Read more »

राष्ट्रीय पशु गाय को मौज की मौत

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मालूम हो कि केरल हाई कोर्ट ने युवक कांगे्रस के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार के आदेश  पर रोक लगाने पर हैरानी जताई। दूसरी ओर ंिहंगौनिया गोशाला मामले मे सुनवाई के दौरान राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि गोवंश की हत्या पर उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया जाए। अभी तीन साल कैद की सजा का प्रावधान है।

गाय की रक्षा मानवता की रक्षा

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डा. राधेश्याम द्विवेदी गौमाता चराचर जगत की माता हैं। इनकी रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। अथर्ववेद में आता है कि गौहत्यारे को काँच की गोली से उड़ा दो। अतः हे भारतवासियो ! जागो और गोवंश की हत्या रोकने के लिए आगे आओ। गौमाता धरती का गौरव है। भारत की 40 करोड़ एकड़ भूमि पर… Read more »

धार्मिक आस्था पर आघात की घृणित राजनीति

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भारतीय संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करके भूमि पुत्र बहुसंख्यक हिंदुओं की आस्थाओं पर निरंतर प्रहार करते रहने की मुगलकालीन परंपरा अभी जीवित है। आज केंद्र में राष्ट्रवादी भाजपानीत राजग सरकार के सशक्त शासन में भी देशद्रोहियों व भारतविरोधियों के षड्यंत्रो पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह कितना विचित्र है कि जिस “कांग्रेस” ने आरंभ… Read more »

गाय की रक्षा पर बहस क्यों ?

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वास्तव में गाय को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की बजाय राजनीति से जोड़ दिया गया है, जिसके कारण इसे जबरन बहस का विषय बना दिया गया. गाय सबके लिए उपयोगी है. इसलिए गाय पर बहस करने की बजाय इसके संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए. सरकार को चाहिए कि वह सड़कों पर विचरती गायों के लिए गौशालाओं का निर्माण कराए.

बिना गाय के मानव का भविष्य धूमिल है

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किसी छोटे से छोटे कार्यक्रम का आयोजन भी बिना उसकी योजना के अपूर्ण ही रहता है। यदि कार्यक्रम की पूर्ण रूपरेखा बना ली गयी है और उसके एक-एक पहलू पर पूर्ण चिंतन-मनन कर लिया गया है तो फिर उसके संपन्न होने में किसी प्रकार की बाधा नही आ सकती। पूर्ण मनोयोग से किये गये कार्य… Read more »

राजनीति का केंद्रबिंदु बनती हमारी गाय

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मृत्युंजय दीक्षित दादरी कांड के बाद गाय देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु उभर कर सामने आ रही है। गाय को अब हर कोई वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाह रहा है। यह तब से राजनीति के केंद्रबिंदु में आ गयी हैं जब से महाराष्ट्र में गोवध पर पुर्ण प्रतिबंध लगाने का… Read more »

गाय: सभी पक्षों का रूख़ गलत!

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-इक़बाल हिंदुस्तानी सियासत न हो तो हिंदुओं की भावना का सम्मान हो सकता है! गाय हिंदुओं भाइयों के लिये हज़ारों साल से पूजनीय और सम्माननीय रही है। गाय में सौ करोड़ देवी देवताओं का वास माना जाता है। गाय एक समय था हमारी खेती के लिये भी लाइफलाइन मानी जाती थी लेकिन आज तर्क और… Read more »

भारतीय अर्थव्यवस्था में गाय

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-प्रमोद भार्गव- गाय का मांस आहार के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर एक बार फिर विवाद सतह पर है। इस बार भाजपा के दो मंत्री आमने-सामने हैं। विडंबना यह है कि गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू गो-मांस खाने पर रोक के पक्ष में हैं, वहीं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकबी गो-मांस खाने वालों… Read more »

गौ रक्षा की एक अनुकरणीय पहल

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-विनोद बंसल- एक ओर जहां कुछ राज्य सरकारें देश की ऊर्जा के मुख्य श्रोत भारतीय गौ-वंश को बचाने में लगी हैं वहीं कुछ विकृत मानसिकता के हिन्दू द्रोही लोग तरह-तरह के कुतर्क देकर उसके दूध व पंचगव्य के सेवन से ऊर्जा ग्रहण करने की बजाय गौ-वंश के ही भक्षण को आतुर हैं। देश के केन्द्रीय मंत्री… Read more »