नोटबंदी

#नोटबंदी के फैसले पर पीएम मोदी  का जनमत संग्रह

कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए मो दी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया और अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी पर जनता से राय मांगी है। नोटबंदी पर पीएम मोदी ने ट्वीट के जरिए देश की जनता से सर्वे में शामिल होने के लिए कहा है। नरेंद्र मोदी ऐप्प पर इस सर्वे में हिस्सा लेकर लोग अपनी राय दे सकते हैं। इस सर् वे में देश के हर व्यक्ति को हि स्सा लेना चाहिए जो स्मार्टफोन या सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं ।

नोटबंदी पर सहयोग, समर्थन और विपक्ष की राजनीति

केजरीवाल दिल्ली विधानसभा का सदुपयोग करने की बजाय उसको केवल पीएम मोदी का विरोध करने का मंत्र बना लिया हैं । जिसमें सभी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके तर्कहीन तरीके से मोदी विरोध किया जाता है तथा उनको जी भरकर गालियां दी जाती हैं। आज केजरीवाल व उनके साथ खड़े हाने वाले सभी नेता जनता की निगाहों में गिर रहे है।अभी तक ममता बनर्जी के गृहराज्य बंगाल से भी किसी बड़ी अराजकता का समाचार नहीं प्राप्त हुआ है। यही कारण है कि वह बौखला गयी हैं।

नोटबंदी पर काली सियासत

प्रधानमंत्री ने दो टूक कह भी दिया है कि उनका अगला निशाना बेनामी संपत्ति होगा। यानी आने वाले दिनों में ऐसे लोगों पर भी गाज गिरनी तय है जो अपनी काली कमाई को रियल इस्टेट और गोल्ड में निवेश कर रखे हैं। यह भी संभव है कि सरकार काले धन से निपटने के लिए अगले फिस्कल ईयर के अंत तक गोल्ड इंपोटर्स पर रोक लगा दे। ऐसा इसलिए कि बड़े नोट बंद होने के बाद बड़े पैमाने पर सोना की खरीदारी की गयी। अच्छी बात है कि सरकार ने रात के अंधेरे में सोना बेचने और खरीदने वालों की जांच शुरु कर दी है।

मोदी की आगरा रैली भाषण में शुरू से अंत तक गरीब और मध्यम वर्ग रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगरा परिवर्तन रैली ने बसपा प्रमुख मायावती की आगरा रैली में जुटी भीड़ के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर आये उससे घंटों पहले ही आगरा का कोठी मीना बाजार मैदान खचाखच भर चुका था। और लोगों का आने का सिलसिला आगरा की सड़कों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन तक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली के लिए लोगों का उत्साह उनके चेहरे से दिख रहा था। लोग कई किलोमीटर से पैदल चलकर मोदी की झलक पाने के लिए पहुंचे और हजारों लोग तो आगरा शहर में जाम के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सभा स्थल तक ही नहीं पहुँच पाए।

#नोटबंदी पर रामभुलावन ने कहा, हम कितने ढीठ किस्‍म के हो गए हैं साहब !

हम कितने ढीठ किस्‍म के हो गए हैं, वह ऐसे ही नहीं कह रहा, उसके पीछे ओर भी कई कारण है। रामभुलावन आगे बोला..मसलन लोगों ने लाइन में लगने को ही धंधा बना डाला, सरकार ने बैंक से नोट बदलने की सुविधा एटीएम का उपयोग करने वालों की तुलना में जो लोग इस का उपयोग नहीं करते हैं, उनको ध्‍यान में रखकर की थी लेकिन हुआ क्‍या ….. लोग चंद रुपयों के लालच में लाइन में लगकर काले को सफेद करने के फेर में पड़ गए। जिसके बाद मजबूरी में सरकार को 4 हजार 500 की नगद राशि परिवर्तन किए जाने के निर्णय को वापिस लेकर उसे 2 हजार रुपए करना पड़ा।

लूट लिया मोदी ने…

देश वाकई में तभी गंभीर, समझदार या ईमानदार बनता है जब उसे चलाने वाले देश के लोगों के उज्जवल भविष्य के लिए ईमानदारी दिखाए, गंभीर हो| भ्रष्टाचार, बेईमानी से कमाया धन भले ही चंद लोगों को सुकून देता हो मगर ईमानदारी की राह पर चलने वाले लोगों के वर्तमान में मोदी हैं, उनकी व्यवस्था में नोटबंदी जैसे फैसले भी हैं और भ्रष्टों को मिटा देने की सनक भी है|

नोटबंदी से संकट में सियासी दल

दरअसल एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफाॅर्म ने एक जनहित याचिका के जरिए कोशिश की थी कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल सूचना अधिकार के कानूनी दायरे में लाए जाएं। इस सिलसिले में केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा 3 जून 2013 को दिए फैसले में छह राष्ट्रीय दलों को इस कानून के तहत ‘पब्लिक आॅथरिटी‘ माना है। इन दलों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, राकांपा, सीपीआई व सीपीएम शामिल हैं।

सांच को नहीं कोई आंच, मोदी और नोटबंदी

माना कि देश परेशान है, लोग हैरान है और परेशानी का सामना कर रहे हैं, लेकिन मीडिया को इस बात में ज्यादा रूचि है कि देश में कैसी-कैसी परेशानियां सामने आ रही हैं। अरे परेशानियां तो आनी ही थी, यदि किसी देश के साथ युद्ध होता तो संभवत: जो कुछ घर में होता बस वही गुजारे का साधन होता, आटा होता तो चून गूंधा जाता और चून नहीं होता तो भूखे सोना होता। हालात थोड़े असामान्य जरूर हैं लेकिन बदतर नहीं है। लोग जैसे भी हो, जद्दो-जहद कर दो जून की रोटी कमाने में और नोट बदलने में कामयाब हो ही रहे हैं।