आर्थिकी राजनीति बजट 2017 : सशक्त वित्तीय अनुशासन का सन्देश February 3, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग – बजट हर वर्ष आता है। अनेक विचारधाराओं वाले वित्तमंत्रियों ने विगत में कई बजट प्रस्तुत किए। पर हर बजट लोगों की मुसीबतें बढ़ाकर ही जाता है। लेकिन इस बार बजट ने नयी परम्परा के साथ राहत की सांसें दी है। इस बजट में कृषि, डेयरी, शिक्षा, कौशल विकास, रेलवे और अन्य बुनियादी […] Read more » Featured किसान कृषि कृषि ऋण गांव एवं गरीब का बजट फसल बीमा एवं ग्रामीण सड़क निर्माण बजट 2017 मध्यमवर्ग को इनकम टैक्स में राहत रेल बजट वित्तीय व्यवस्था में निवेशकों का भरोसा सिंचाई व्यय
आर्थिकी विविधा भारत की ईंधन आपूर्ति की दूसरों पर निर्भरता कितनी सार्थक है ? January 26, 2017 by मयंक चतुर्वेदी | 1 Comment on भारत की ईंधन आपूर्ति की दूसरों पर निर्भरता कितनी सार्थक है ? डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत के लिए यह एक अच्छी बात है कि जब से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं, विश्व स्तर पर देश पूर्व की अपेक्षा ओर अधिक शक्ति सम्पन्नता की दृष्टि से देखा जाने लगा है। विदेशी मुल्कों से जो अनुबंध इन दिनों हुए भी हैं तो वे ज्यादातर भारत के पक्ष […] Read more » dependency for fuel on gulf countries ईंधन आपूर्ति ईंधन आपूर्ति की दूसरों पर निर्भरता ईंधन आपूर्ति की निर्भरता भारत भारत की ईंधन आपूर्ति
आर्थिकी राजनीति तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए January 16, 2017 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | 2 Comments on तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए बहरहाल, हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है? जो लोग गांधीजी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें ध्यान करना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे अधिक प्रचारित 'स्वच्छ भारत अभियान' को महात्मा गांधी को ही समर्पित किया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए गांधीजी के चित्र और उसके प्रतीकों का ही उपयोग किया जाता है। Read more » Featured कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर खादी के प्रचार-प्रसार के लिए 'ब्रांड मोदी' गांधी तस्वीर गांधी विचार गांधी विचार पर बहस गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए
आर्थिकी राजनीति नोटबन्दी : क्या खोया-क्या पाया? January 8, 2017 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार मोदी सरकार द्वारा 8 नवम्बर से 1,000 एवं 500 रू. पर लागू #नोटबंदी की अवधि 30 दिसम्बर को समाप्त हो चुकी है। नोटबंदी के विरोध में जब विरोधी दलों ने तमाम तरह की कटु आलोचना करना शुरू कर दिया और सड़को पर उतरने लगे। तब प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से कहा कि […] Read more » notebandi क्या खोया-क्या पाया नोटबन्दी फर्जी विकास बेनामी हस्तान्तरण कानून समानान्तर अर्थव्यवस्था
आर्थिकी विविधा नोटबंदी की असली परीक्षा व परिणाम 2017 में January 2, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment मृत्युंजय दीक्षित विगत 8 नवंबर 206 को पीएम मोदी ने अचानक से देश को संबोधित करते हुए 500 व हजार के नोट बंद कर देने और कालेधन ,आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐतहासिक जंग का ऐलान किया था। पीएम मोदी ने इस महाअभियान में जनता से 50 दिन का सहयोग मांगा था जो अब पूरा […] Read more » cashless economy Featured नोटबंदी नोटबंदी 2017 में नोटबंदी की परिणाम 2017 में नोटबंदी पर समर्थन नोटबंदी पर सहयोग विपक्ष की राजनीति
आर्थिकी विविधा प्रधानमंत्री से रक्षा बजट पर देश को उम्मीदें December 17, 2016 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment हाल ही में आई शोध फर्म आइएचएस मार्किट की जेन्स डिफेंस बजट्स रिपोर्ट 2016 बताती है कि रक्षा पर खर्च करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों में अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद भारत का चौथा स्थान है। इस साल भारत का रक्षा बजट 50.7 अरब डॉलर (करीब 3.41 लाख करोड़ रुपये) है। जबकि पिछले साल यह 46.6 अरब डॉलर था। इस रिपोर्ट के आंकड़े देखकर एक बात की संतुष्टि तो है कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन का लाभ सामरिक मामले में भी हुआ है Read more » Army budget Featured Indian defence budget
आर्थिकी विविधा ‘मेरा भारत महान’, जहाँका ‘जनजन बेईमान’ December 17, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on ‘मेरा भारत महान’, जहाँका ‘जनजन बेईमान’ इस देश के रग-रग में भ्रष्टता है, चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे। मुझे बस एक ही ईमानदार दिखाई दे रहा है। इस कुरुक्षेत्र में वो प्रधान सेवक है, वो बर्बरीक है, जिसने अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर (भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर) खूब तमाशा देख व दिखा रहा है। उस बर्बरीक ने सबको नंगा करके रख दिया है । अपनों को,गैरों को, मुझको, आपको और सबको।हम यदि उसको सहयोग ना कर सके तो कमसे कम हो-हल्ला करने वालों को रोकने-टोकने वा जनता में उसके सही मैसेज को पहुंचाने का काम तो कर ही सकते हैं। Read more » ‘जनजन बेईमान’ Featured notebandi मेरा भारत’ “महान
आर्थिकी वीडियो बीता साल नोटबन्दी का हाहाकार : क्राइम ग्राफ नीचे December 15, 2016 by अनिल अनूप | Leave a Comment #नोटबंदी के बाद काली कमाई को ठिकाने लगाने के कई दिलचस्प किस्से सामने आए. कहीं जुगाड़ से काले धन को बैंक में जमा करा लिया तो कहीं पर पैसों को दान-दक्षिणा में बांट दिया...लेकिन, जब इतने से भी मामला सेट नहीं हुआ तो धन कुबेरों को पानी में बहाना पड़ा काली कमाई का खजाना. Read more » crime graph down due to notebandi Featured नोटबंदी नोटबन्दी का हाहाकार
आर्थिकी विविधा नीचे के भ्रष्टाचार पर भी कार्यवाही हो December 15, 2016 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक प्रकार से आयुर्वेद जैसी उपचार पद्धति अपनाई है। आयुर्वेद उपचार की विशेषता है कि धीरे धीरे ही सही समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी। किसी भी प्रकार की समस्या को इस पद्धति से समाप्त करने के लिए धीरज रखने की आवश्यकता है। देश की जनता जितना धीरज से काम लेगी, उतना ही अ‘छा होगा। इससे देश को तो बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला ही है, लेकिन आम जनता भी आने वाले समय में प्रसन्नता का अनुभव करेगी। Read more » Featured notebandi नीचे के भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार
आर्थिकी विविधा नोटबंदी को पलीता लगाते बैंक December 13, 2016 / December 13, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव पुराने नोटों के बदले नए नोटों के रूप में जिस तरह से कालेधन को सफेद धन में बदलने का काम बैंक कर रहे हैं, उससे साफ है नरेंद्र मोदी की इस पहल को पलीता लगाने का काम देश के सरकारी और निजि बैंक कर रहे हैं। यही वजह है कि बैंकों में कतारें […] Read more » Featured नोटबंदी नोटबंदी को पलीता लगाते बैंक बैंक
आर्थिकी विविधा भारतीय रुपये का इतिहास December 13, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on भारतीय रुपये का इतिहास *डा.राधेश्याम द्विवेदी* रुपया शब्द का उद्गम संस्कृत के शब्द ‘रुप्’ या ‘रुप्याह्’ में निहित है, जिसका अर्थ चाँदी होता है और ‘रूप्यकम्’ का अर्थ चाँदी का सिक्का होता है। मुद्राओं के रंग-रूप और मूल्य कई बार बदले गये हैं. उनमें जालसाजी रोकने के लिए सुरक्षा के उपाय किये जाते रहे हैं. भारत में पहले चीन […] Read more » Featured भारतीय रुपये का इतिहास
आर्थिकी आलोचना जिन पर देश बदलने की जिम्मेदारी है वो नहीं बदल रहे तो देश कैसे बदलेगा December 12, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 1 Comment on जिन पर देश बदलने की जिम्मेदारी है वो नहीं बदल रहे तो देश कैसे बदलेगा कभी हमारी सरकार ने सोचा है कि भारत के जिस आम आदमी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया था औरतों ने अपने गहने कपड़े ही नहीं अपने बच्चों तक को न्यौछावर कर दिया था , वो आम आदमी जो मन्दिरों में दान करने में सबसे आगे होता […] Read more » currency crisis created by banks Featured money laundering by banks