व्यंग्य साहित्य सम्मानित करने का टुकड़ा June 11, 2017 by अशोक गौतम | Leave a Comment ज्यों ही यह खबर पूरे जंगल में जंगल की आग की तरह फैली कि मैं अबके फिर अपनी टांग अड़ा सरकार की नरवंश अधिसूचना कमेटी का सक्रिय सदस्य हो गया हूं, तो मुझे देश के समस्त पशुओं, जानवरों के संगठनों के फोन पर फोन आने लगे। आदमी तो मुझे देखते ही ऐसे गायब हो जाते […] Read more » नरवंश अधिसूचना कमेटी सम्मानित सम्मानित करने का टुकड़ा
व्यंग्य राहुल बाबा का गीता ज्ञान June 11, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment मेरी राय है कि इसके बाद वे रामायण, महाभारत, वेद, पुराण और स्मृतियों का भी अध्ययन करें। अच्छा हो वे श्री गुरुग्रंथ साहब, बाइबल, कुरान, त्रिपिटक और जैनागम ग्रंथ भी पढ़ें। इससे उन्हें भारत में प्रचलित विभिन्न धर्म, पंथ, सम्प्रदाय और मजहबों के बारे में पता लगेगा। इस जन्म की तो मैं नहीं जानता, पर शायद इससे उनका अगला जन्म सुधर जाए। Read more » Featured Rahul Gandhi reading Gita and Upanishaad राहुल बाबा का गीता ज्ञान
दोहे साहित्य मो कूँ रहत माधव तकत ! June 10, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment मो कूँ रहत माधव तकत, हर लता पातन ते चकित; देखन न हों पावति तुरत, लुकि जात वे लखि मोर गति ! मैं सुरति जब आवति रहति, सुधि पाइ तिन खोजत फिरति; परि मुरारी धावत रहत, चितवत सतत चित मम चलत ! जानत रहत मैं का चहत, प्रायोजना ता की करत; राखत व्यवस्थित व्यस्त नित, […] Read more » मो कूँ रहत माधव तकत
कहानी साहित्य पागल June 10, 2017 by तेजू जांगिड़ | Leave a Comment गाँव में उन दिनों खूब आंधी चल रही थी जिससे वहां की बालू रेत भी खूब उड़ रही थी। सारा माहौल कुछ मटमैले रंग का प्रतीत हो रहा था। एक तो आंधी ऊपर से ये तेज धूप, कोई अपने घरों से दोपहर को बाहर तक नहीं निकलता था। कौन खामखां आंधी में परेशानी उठाए भला। […] Read more » पागल
लेख साहित्य ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या June 10, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या डा. राधेश्याम द्विवेदी वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, “अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या” और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग 144कि.मी) लम्बाई तीन योजन (लगभग 36 कि.मी.) चौड़ाई में […] Read more » Featured अयोध्या
लेख साहित्य आजादी के महानायक बिरसा मुंडा June 9, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 9 जून विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित आजादी के महानायक और मुंडा आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा । बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से जबर्दस्त संघर्ष करते हुए 9 जून 1900 को अंतिम संास ली थी। ज्ञातव्य है कि तत्त्कालीन झारखंड राज्य अंग्रेजांे के आधीन हो चुका था और अंग्रेजों ने आदिवासियों के साथ काफी निर्ममतापूर्वक व्यवहार किया […] Read more » बिरसा मुंडा
लेख साहित्य भारत के राष्ट्रपुरुष शिवाजी महाराज June 8, 2017 by ललित कौशिक | Leave a Comment ललित कौशिक जब देश परतंत्र में जाता है तब शासनकर्ता की जमात का अनुकरण और अनुसरण लोग करने लगते हैं और समाज का नेतृत्व करने वाले विद्वतजन, सेनानी, राजधुरंधर परानुकरण में धन्यता मानने लगते हैं. जिससे समाज भी इन्हीं लोगों का अनुकरण करना शुरू कर देता है जिसके कारण धर्म की ग्लानि होती है, परधर्म […] Read more »
कविता ये ज़रूरी तो नहीं June 8, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment मैं ख़ुद से ही रूठी रहती हूँ, कोई मनाये मुझको आकर, ये ज़रूरी तो नहीं, मैं ख़ुद को ही मना लेती हूँ। कुछ भी लिखूं या करूँ मैं जब अपनी प्रशंसा भी कर लेती हूँ , कोई और भी मेरा प्रशंसक हो, ये ज़रूरी तो नहीं………… जो भी काम पूरा कर लेती हूँ, […] Read more » ये ज़रूरी तो नहीं
लेख साहित्य कौन कहता है कि हम एक हजार वर्ष गुलाम रहे June 7, 2017 by राकेश कुमार आर्य | 3 Comments on कौन कहता है कि हम एक हजार वर्ष गुलाम रहे झूठे चाटुकारों से और लेखनी को बेचकर व आत्मा को गिरवी रखकर लिखने वाले इतिहासकारों से स्वतंत्रता के अमर सैनानियों के ये पावन स्मारक यही प्रश्न कर रहे हैं। समय के साथ हम इन प्रश्नों को जितना उपेक्षित और अनदेखा करते जा रहे हैं-उतना ही बड़ा प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है। Read more » 712 ई. में मौहम्मद बिन कासिम Featured गुरू अर्जुन गुरू गोविंद सिंह गुरू तेगबहादुर गोरा और बादल जयमल और फत्ता दुर्गादास और शिवाजी पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी महाराणा सांगा और प्रताप राजा कर्ण हजार वर्ष गुलाम हरि सिंह नलवा
कविता साहित्य एक क़दम तुम बढ़ाओ…… June 6, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment एक क़दम तुम बढ़ाओ, दो हम बढ़ायेंगे। फ़ासले जो दरमियां हैं, दूर होते जायेंगे। दूरियाँ मन की नहीं थीं, विचारों के द्वन्द थे, आओ बैठो, बातें करो,मसले सब सुलझ जायेंगे। वक़्त मिलता ही नहीं…,…… कहने से उलझने बढ़ जायेंगी। वक़्त को वक़्त से चुराकर, कुछ वक़्त तो देना पड़ेगा। एक छोर तुम पकड़ना, मैं हर […] Read more » एक क़दम तुम बढ़ाओ
कविता ‘आज’ का क्या करूं मै June 6, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment वो शाम चुलबुली सी रातें खिली खिली सी वक़्त के समंदर में वो वक़्त ही घुल गया है। अब शांत सी शामें हैं, चादर में नहीं हैं सिलवट नींद से रूठा मनाई, यादें आईं नई पुरानी, बचपन की कोई कहानी या जवानी की नादानी, रातों को आंखो में आकर, नीदें चुराने लगी हैं। भविष्य भी […] Read more » ‘आज' का क्या करूं मै
कविता साहित्य मैं मैं हूँ मैं ही रहूँगी June 6, 2017 by बीनू भटनागर | 10 Comments on मैं मैं हूँ मैं ही रहूँगी मै नहीं राधा बनूंगी, मेरी प्रेम कहानी में, किसी और का पति हो, रुक्मिनी की आँख की किरकिरी मैं क्यों बनूंगी मै नहीं राधा बनूँगी। मै सीता नहीं बनूँगी, मै अपनी पवित्रता का, प्रमाणपत्र नहीं दूँगी आग पे नहीं चलूंगी वो क्या मुझे छोड़ देगा मै ही उसे छोड़ दूँगी, मै सीता नहीं बनूँगी। मै […] Read more » मैं मैं हूँ मैं ही रहूँगी