लेख विधि-कानून न्याय-व्यवस्थाः सुधार के संकेत November 23, 2022 / November 23, 2022 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment – डॉ. वेदप्रताप वैदिकसर्वोच्च न्यायालय में आए एक ताजा मामले ने हमारी न्याय-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है लेकिन उसने देश के सारे न्यायालयों को नया […] Read more » Judiciary: Signs of improvement न्याय-व्यवस्था
राजनीति विधि-कानून न्यायिक अंधेरों में उम्मीद की किरण बनतेे चन्द्रचूड़ November 18, 2022 / November 18, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- भारत की न्याय प्रणाली विसंगतियों एवं विषमताओं से घिरी है। संवैधानिक न्यायालय का गठन बड़ा अलोकतांत्रिक व दोषपूर्ण है। न्याय-व्यवस्था जिसके द्वारा न्यायपालिकाएं अपने कार्य-संचालन करती है वह अत्यंत महंगी, अतिविलंबकारी और अप्रत्याशित निर्णय देने वाली है। ‘न्याय प्राप्त करना और इसे समय से प्राप्त करना किसी भी राज्य व्यवस्था के व्यक्ति का […] Read more » Chandrachud becomes a ray of hope in judicial darkness जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़
राजनीति विधि-कानून नए चीफ जस्टिस के समक्ष है चुनौतियों का अंबार November 16, 2022 / November 16, 2022 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment – योगेश कुमार गोयलजस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने 9 नवम्बर को देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) का दायित्व संभाल लिया है। वे देश की सबसे बड़ी अदालत में 10 नवम्बर 2024 तक इस सर्वोच्च पद पर आसीन रहेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहते अयोध्या मामले, आईपीसी की धारा 377 के […] Read more » Justice Dhananjay Yashwant Chandrachud There are many challenges before the new Chief Justice जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़
राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए? November 7, 2022 / November 7, 2022 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment अवकाश की अवधारणा औपनिवेशिक नियमों से उत्पन्न हुई है। उस समय न्यायाधीश इंग्लैंड से आए थे, भारत की तुलना में ठंडी जगह और भारत की गर्मी उनके लिए असहनीय थी। अदालतों और स्कूलों को छोड़कर देश में कोई भी सरकारी संगठन नहीं है जहाँ छुट्टी होती है। भारतीय अदालतों में 3.1 करोड़ से अधिक मामले […] Read more » न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति
राजनीति विधि-कानून हिजाबः हिरन पर क्यों लादे घांस? September 9, 2022 / September 9, 2022 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment आजकल सर्वोच्च न्यायालय में बहस चल रही है कि कर्नाटक की मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनें या न पहनें? उच्च न्यायालय ने हिजाब पर पाबंदी को उचित ठहराया है। यहां बहस यह नहीं है कि हिजाब पहनना उचित है या नहीं? सिर्फ स्कूल की छात्राएं पहने या न पहनें, यह प्रश्न है। इस मुद्दे पर पहला […] Read more » Hijab hijab row muslim school girls on hijab row muslim students wearing hijab in karnataka
राजनीति विधि-कानून ये न्याय है या मज़ाक ? August 3, 2022 / August 3, 2022 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 1 Comment on ये न्याय है या मज़ाक ? डॉ. वेदप्रताप वैदिक यह शुभ-संकेत है कि भारत की न्याय-व्यवस्था की दुर्दशा पर हमारे प्रधानमंत्री और प्रमुख न्यायाधीशों ने आजकल खुलकर बोलना शुरु किया है। हम आजादी का 75 वाँ साल मना रहे हैं लेकिन कौनसी आजादी है, यह! यह तो सिर्फ राजनीतिक आजादी है याने अब भारत में ब्रिटिश महारानी की जगह राष्ट्रपति और […] Read more » Is this justice or a joke PM on justice system of India
लेख विधि-कानून त्वरित न्याय का अधूरा सपना July 14, 2022 / July 14, 2022 by यशपाल सिंह | Leave a Comment यशपाल सिंह साभार ::दैनिक जागरण _24.6.2022 देश में आजकल बुलडोजर न्याय की बहुत चर्चा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। जिन्हें बुलडोजर न्याय पर आपत्ति है, वे कभी यह सवाल नहीं उठाते कि अदालतों में तारीख पर तारीख का सिलसिला क्यों कायम रहता है? इस सवाल का जवाब न मिल पाने के […] Read more » unfulfilled dream of speedy justice
लेख विधि-कानून देश में हिंसक होते युवा आंदोलन July 1, 2022 / July 1, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment -सत्यवान ‘सौरभ’ गोल्डस्टोन ने लिखा है, “युवाओं ने पूरे इतिहास में राजनीतिक हिंसा में एक प्रमुख भूमिका निभाई है,” और एक युवा उभार कुल वयस्क आबादी के सापेक्ष 15 से 24 युवाओं का असामान्य रूप से राजनीतिक संकट से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में, युवा हिंसा के कारण जान-माल […] Read more » Violent youth movement in the country
लेख विधि-कानून ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों? June 27, 2022 / June 27, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment सत्यवान ‘सौरभ’ आरक्षण, सात दशकों के बावजूद, हमारे विषम समाज में कई समूहों के लिए लाभों के समान वितरण में अनुवादित नहीं हुआ है। नतीजतन, कई समूहों को छोड़ दिया गया है। आरक्षण का लाभ नहीं उठा पाने वाले हाशिए के तबके के लोगों की जोरदार मांग है। इसके लिए कुछ नीति विकल्प तैयार करने […] Read more » Reservation Why the discrimination of the creamy layer against OBC? ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों
राजनीति विधि-कानून चुनावी रिफॉर्म्स की फिर वकालत June 15, 2022 / June 15, 2022 by श्याम सुंदर भाटिया | Leave a Comment प्रो. श्याम सुंदर भाटिया आजादी के अमृत महोत्सव बरस में चुनाव आयोग और शक्तिशाली होना चाहता है। 72 साल के अपने लंबे एवम् कटु अनुभवों के आधार पर इलेक्शन कमीशन ने बड़े बदलाव की कार्ययोजना को मूर्त रूप दिया है। नए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई मैराथन मीटिंग में छह सिफारिशों […] Read more » Advocating for electoral reforms again चुनावी रिफॉर्म्स चुनावी रिफॉर्म्स की फिर वकालत
राजनीति विधि-कानून समान नागरिक संहिता मुस्लिम महिलाओं के लिए सम्मानजनक कानून है May 16, 2022 / May 16, 2022 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment -डॉ. सौरभ मालवीयसमान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में एक बार फिर से बहस जारी है। देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात बार-बार उठती रही है, परन्तु इस पर विवाद होने के पश्चात यह मामला दबकर रह जाता है। किन्तु जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी हुई है, तब […] Read more » uniform civil code Uniform Civil Code is a respectable law for Muslim women समान नागरिक संहिता
लेख विधि-कानून सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लेकर भ्रामकता सही नहीं है’ May 13, 2022 / May 15, 2022 by कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल | Leave a Comment ~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलमध्यप्रदेश के पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में बगैर ओबीसी आरक्षण के निर्वाचन सम्पन्न कराने एवं अधिसूचना जारी करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया है। किन्तु इस पर राजनैतिक गिद्ध दृष्टि गड़ाने वाले इस निर्णय को भी निराशापूर्ण बताते हुए अपनी वोटबैंक की राजनीति सिद्ध करना चाह रहे हैं। ये […] Read more » Misleading about the decision of the Supreme Court is not right. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लेकर भ्रामकता सही नहीं