Category: विविधा

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शांति और प्रेम का संदेश देती है बुद्ध पूर्णिमा

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यह लाल बलुई मिटटी की बनी है। यह मूर्ति भी इसी स्थान से निकाली गयी थी। मंदिर के पूर्वी हिस्से में एक स्तूप कहा जाता है कि यहां पर भगवानबुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था। श्रीलंका व अन्य दक्षिण पूर्व एशियाइ देशों में इस दिन को बेसाक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।पूर्णिमा के दिन बौद्ध अनुयायी अपने घरों में दीपक जलाते हैं। फूलों से घरों को सजाते है। सभी बौद्ध बौद्ध ग्रंथ का पाठ करते हैं। बोधगया सहित भगवान बुद्ध सें सम्बंधित सभी तीर्थस्थलों व स्तूपों व महत्व के स्थानों को सजाया जाता है। कई जगह मेले भी लगते हैें।

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परस्पर संवादहीनता: घातक जहर

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कुछ ही पलों में घटना के पक्ष या विपक्ष में व्हाट्सअप के सजे हुए मैसेज आंकडों सहित वाइरल होने लगते हैं । पता नहीं देखते देखते तमाम आंकडे लिये ये मैसेज इतनी जल्दी, कहॉं से और कैसे बनकर लोगों के पास आ जाते हैं और उसके प्रत्युत्तर में भी लाजवाब मैसेज दनादन घूमने लगते हैं । इसके बाद सिलसिला शुरू होता है एसएमएस और व्हाट्सअप के माध्यम से घटना के विभिन्न पहलुओं के पक्ष और विपक्ष मंे अपनी राय देकर वोट करने का । जागरूक जनता अपना सभी जरूरी कार्य छोडकर ऐसी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को प्राथमिकता भी देती है । यही सिलसिला एक सप्ताह, पंद्रह दिन, और कई बार तो महीने भर से ज्यादा की ब्रेकिंग न्यूज का हिस्सा बनकर हमंे व्यस्त और तनावग्रस्त किये रहती है ।

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आतंकियों का पुनर्वास व मुस्लिम घुसपैठ…..

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जम्मू-कश्मीर की एक और संवेदनशील समस्या विचार करने योग्य है कि पीओके के नागरिकों को कश्मीर में अपने बिछुड़े हुए परिवार से मिलने व स्वास्थ्य सम्बंधित सेवाओं के लिये पहले केवल एक माह तक रहने की छूट थी । परंतु पिछली सोनिया गांधी /मनमोहन सिंह की सरकार ने मार्च 2011 में इस अवधि को छह माह तक बढ़ा दिया और उसपर भी मल्टीपल एंट्री की छूट और दे दी। इस प्रकार पीओके से आने वाले विभिन्न लोग कश्मीर में छह माह तक रह सकते है और इन अवधि में वे कितनी ही बार पीओके व कश्मीर के मध्य आना जाना कर सकते है। जब यह वर्षो से सर्वविदित ही था और है कि पीओके में अनेक आतंकवादियों के अड्डे बने हुए है और उनका कश्मीर के रास्ते भारत मे आतंक फैलाने ही मुख्य मिशन है तो यह आत्मघाती निर्णय किस राजनीति का भाग है ?

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यमुना में जहर रोकिये, जीव पर्यावरण तथा स्मारकों को बचाइये

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तीन प्रजातियों के कीड़े का हमला:- ताजमहल पर एक नहीं, बल्कि तीन प्रजातियों के कीड़े हमला कर रहे हैं। यमुना में फास्फोरस बढ़ने के कारण गोल्डी काइरोनोमस, पोडीपोडीलम और ग्लिप्टोटेन पहुंच रहे हैं। एएसआई को बीते साल की सैंपलिंग में ये तीनों कीड़े हरा रंग छोड़ते हुए मिले थे। हर दिन लाखों की तादात में यह हमला किया गया था। काइरोनोमस फैमली के यह कीड़े 35 डिग्री तापमान में प्रजनन शुरू करते हैं और 50 डिग्री तक के तापमान को झेल सकते हैं। काइरोनोमस मादा कीट एक बार में एक हजार तक अंडे देती है। लार्वा और प्यूमा के बाद करीब 28 दिन में पूरा कीड़ा बनता है। हालांकि कीड़े की मियाद महज दो दिन है लेकिन मादा कीट के अंडे यमुना नदी में भीषण गंदगी और फास्फोरस की मौजूदगी से बन रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थित ताजमहल के पास है। यहां सीवर का बैक्टीरिया बहुत घातक है। एसएन मेडीकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायॉलोजी के हेड डॉ. अंकुर गोयल ने बताया कि सीवर से उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया का नाम 'इश्चेरियाई कोलाई' है। यह तमाम बीमारियां फैलाता है। मानक से दस गुना अधिक है।

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