प्रवक्ता न्यूज़ बिलखती आंखों की यही पुकार, मेरे बच्चे को बचा लो सरकार

बिलखती आंखों की यही पुकार, मेरे बच्चे को बचा लो सरकार

मुरली मनोहर श्रीवास्तव  मजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत, सरकारी व्यवस्था पर उठा रहा सवाल  पिछले कई वर्षों से बीमारियों के निदान…

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लेख त्यागी बाबा के अवतार

त्यागी बाबा के अवतार

भारत त्यागी और बैरागियों का देश है। धन, वैभव, राजपाट और परिवार को लात मारने वालों की यहां लम्बी परम्परा रही है। गौतम बुद्ध हों…

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समाज मुसलमान: राष्ट्रवाद और मुख्य धारा

मुसलमान: राष्ट्रवाद और मुख्य धारा

भारत के अधिकांश भागों पर 700-800 वर्षो तकशासन करने वाले आक्रान्ताओं के वंशजों को भारत की मुख्य धारा से अलग मान कर उन्हें दीन-हीन समझना…

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व्यंग्य एक और बार

एक और बार

दिलीप कुमार “एक और बार ” के समवेत स्वर वाला विज्ञापन देश में इस वक्त ये  दिन रात  संचार माध्यमों में आ रहा है ।पान…

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लेख परेशान करती है कश्मीर की जमीनी सच्चाई

परेशान करती है कश्मीर की जमीनी सच्चाई

 केवल कृष्ण पनगोत्रा कश्मीर मुद्दा स्वार्थ की राजनीति का एक ऐसा अखाड़ा बन चुका है जहां अपनी-अपनी दृष्टि और गणित के हिसाब से वोटों…

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कविता एक नारी के मन की पीड़ा

एक नारी के मन की पीड़ा

आर के रस्तोगी पास रह कर भी तुम,मुझसे दूर क्यों चले जाते हो ?बिना कसूर बताये मेरा, नाराज क्यों हो जाते हो ? करती हूँ…

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चिंतन मौलिक चिंतन  में भाषाकी भूमिका

मौलिक चिंतन में भाषाकी भूमिका

डॉ. मधुसूदन ’जिस समाज में मनुष्य जन्म लेता है; अनजाने (और अन चाहे)ही वह, उस  समाज में बोली जाने वाली भाषा का बंदी बन जाता…

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चिंतन ऋषि दयानन्द ने धर्म पालन में वेद-प्रमाण, तर्क एवं युक्तियों को प्रतिष्ठित किया

ऋषि दयानन्द ने धर्म पालन में वेद-प्रमाण, तर्क एवं युक्तियों को प्रतिष्ठित किया

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध तक विश्व में वेदों की शिक्षाओं के अनुरूप एक ही धर्म ‘‘वैदिक धर्म” प्रचलित…

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चिंतन महाभारत के बाद वेदों के विलुप्त होने से मनुष्यमात्र की हानि हुई

महाभारत के बाद वेदों के विलुप्त होने से मनुष्यमात्र की हानि हुई

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। सृष्टि के आरम्भ से महाभारत काल तक समूचे विश्व में वेद और ऋषि परम्परा अपने पूरे प्रभावशाली रूप से प्रचलित रही।…

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महत्वपूर्ण लेख “वैदिक धर्म और स्त्री-पुरुष के अधिकार”

“वैदिक धर्म और स्त्री-पुरुष के अधिकार”

–मनमोहन कुमार आर्य- पं0 लोकनाथ तर्कवाचस्पति जी के नाम से सभी स्वाध्यायशील आर्यबन्धु परिचित हैं। आपने यज्ञ-प्रार्थना ‘यज्ञरूप प्रभु हमारे भाव उज्जवल कीजिये छोड़ देवे…

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लेख आचार्य महाप्रज्ञ तुम्हारे अहिंसा बल को प्रणाम!

आचार्य महाप्रज्ञ तुम्हारे अहिंसा बल को प्रणाम!

– ललित गर्ग- भारतभूमि अनादिकाल से अहिंसा एवं योग की प्रयोगभूमि रही है। अहिंसा एवं योग-साधना की यह गंगा बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जिस…

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कविता शाम से ही बस तेरी याद आने लगती है

शाम से ही बस तेरी याद आने लगती है

आर के रस्तोगी शाम से ही बस तेरी याद आने लगती है |दिल से एक ही आवाज आने लगती है || होगा मिलन जब ये…

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