कविता अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा

अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा

बंद कर दिया है सांपों को सपेरे ने यह कह कर अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा पल्ला झाड़ लेती है पुलिस…

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समाज लुप्तप्राय हो रहे हैं पुरातन संसाधन

लुप्तप्राय हो रहे हैं पुरातन संसाधन

अनिल अनूप लोकजीवन में देसी परिवहन के साधनों में ‘बैलगाड़ी’ हमारी परम्परा एवं किसानी संस्कृति का ऐसा मजबूत आधार रही है, जिसके बिना किसान के…

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न्यूज़ “आर्यसमाज से जुड़े श्री ओम् प्रकाश गैरोला को सभी बैंको की राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त हिन्दी निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार”

“आर्यसमाज से जुड़े श्री ओम् प्रकाश गैरोला को सभी बैंको की राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त हिन्दी निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार”

मनमोहन कुमार आर्य, श्री ओम् प्रकाश गैरोला हमारे 40 वर्षों से अधिक समय से एक घनिष्ठ एवं प्रिय मित्र हैं। हम दोनों एक साथ जनवरी,…

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राजनीति कितना प्रभावी होगा हाथी-पंजे का साथ

कितना प्रभावी होगा हाथी-पंजे का साथ

जावेद अनीस मध्यप्रदेश में कांग्रेस इस बार वापसी के इरादे से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करती हुई दिखाई पड़ रही है, सूबे में पार्टी…

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कविता एक गजल कशिश ए मोहब्बत पर

एक गजल कशिश ए मोहब्बत पर

आर के रस्तोगी कशिश ए मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने हुए जो तुमसे दूर तो सब दूरियां मिटाई हमने करीब थे इतने कि…

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कविता अखिलता की विकल उड़ानों में !

अखिलता की विकल उड़ानों में !

रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ अखिलता की विकल उड़ानों में, तटस्थित होने की तरन्नुम में; उपस्थित सृष्टा सामने होता, दृष्टि आ जाता कभी ना आता !…

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गजल न रख इतना नाजुक दिल

न रख इतना नाजुक दिल

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ इश्क़ किया तो फिर न रख इतना नाज़ुक दिल माशूक़ से मिलना नहीं आसां ये राहे मुस्तक़िल तैयार मुसीबत को न कर सकूंगा दिल मुंतकिल क़ुर्बान इस ग़म को तिरि ख़्वाहिश मिरि मंज़िल   मुक़द्दर यूँ सही महबूब तिरि उल्फ़त में बिस्मिल तसव्वुर में तिरा छूना हक़ीक़त में हुआ दाख़िल कोई हद नहीं बेसब्र दिल जो कभी था मुतहम्मिल गले जो लगे अब हिजाब कैसा हो रहा मैं ग़ाफ़िल   तिरे आने से हैं अरमान जवाँ हसरतें हुई कामिल हो रहा बेहाल सँभालो मुझे मिरे हमदम फ़ाज़िल नाशाद न देखूं तुझे कभी तिरे होने से है महफ़िल कैसे जा सकोगे दूर रखता हूँ यादों को मुत्तसिल  

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समाज राष्ट्रीय—एकता एक चिंतन

राष्ट्रीय—एकता एक चिंतन

शिवदेव आर्य, किसी भी राष्ट्र के लिये राष्ट्रीय एक ता का होना अत्यन्त आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को सशक्त व संगठित बनाये रखने की…

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धर्म-अध्यात्म “सृष्टि को बनाने व पालन करने वाला ईश्वर कैसा है?”

“सृष्टि को बनाने व पालन करने वाला ईश्वर कैसा है?”

मनमोहन कुमार आर्य, हम इस संसार में उत्पन्न हुए और जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जन्म के समय हमने जब पहली बार आंखे खोली तो…

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राजनीति मतदाता को मुखर होना होगा

मतदाता को मुखर होना होगा

 ललित गर्ग  भारतीय राजनीति की अनेक विसंगतियों एवं विषमता में एक बड़ी विसंगति यह है कि राजनेताओं सुविधानुसार अपनी ही परिभाषा गढ़ता रहा है। अपने…

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कविता जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां

जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां

आर के रस्तोगी   जो चाहा कभी पाया नहीं जो पाया कभी चाहा नहीं जो सोचा कभी मिला नहीं जो मिला कभी पाया नहीं जो…

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राजनीति भाजपा के मुद्दों को साझा करती कांग्रेस

भाजपा के मुद्दों को साझा करती कांग्रेस

प्रमोद भार्गव कोई स्पष्ट राजनीतिक अजेंडा नहीं होने के चलते दुविधाग्रस्त कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी के बुनियादी मुद्दों को ही साझा करती दिख रही है।…

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