तो क्या ट्रायल कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है
Updated: January 5, 2018
वीरेन्द्र सिंह परिहार 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में सी.बी.आई. की विशेष अदालत का फैसला जिसमे ए. राजा और काणिमोझी समेत अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर…
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अमेरिका ने तरेरीं पाकिस्तान पर आंखें
Updated: January 5, 2018
प्रमोद भार्गव तू डाल-डाल, हम पात-पात, कहावत एक बार फिर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में सामने आई है। इसलिए यह आशंका बरकरार है कि…
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चीन की अरुणाचल प्रदेश के अस्तित्व को चुनौती
Updated: January 5, 2018
प्रमोद भार्गव चीन ने एक बार फिर सीमा विवाद खड़ा कर दिया है। दिसंबर 2017 में चीनी सैनिकों की भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के…
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बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निर्णायक मूड में नमो सरकार
Updated: January 4, 2018
अंततः संघ परिवार की नीतियों के अनुरूप बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदर्भ में असम की सर्वानंद सरकार ने व केंद्र कीनमो सरकार ने अपना राष्ट्रवादी मास्टर प्लान लागू कर दिया है. 22 फरवरी 2014 को, लोस चुनाव के दौरान भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने असम के सिलचर में कहा था- ‘बांग्लादेश से दो तरह के लोगभारत में आए हैं. एक शरणार्थी हैं जबकि दूसरे घुसपैठिये. अगर हमारी सरकार बनती है तो हम बांग्लादेश से आएहिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के साथ ही घुसपैठियों को यहां से बाहर खदेड़ने का भी वादा करते हैं.’ भाजपा नेअसम में लोकसभा व विधानसभा दोनों चुनावों में “जाति, माटी, भेटी” यानि जाति, जमीन और अस्तित्व की रक्षा करनेके नाम पर वोट मांगे थे. सत्ता में आने के बाद 19 जुलाई 2016 को नमो सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ‘नागरिकता(संशोधन) विधेयक,2016’ पेश किया. यह विधेयक 1955 के उस ‘नागरिकता अधिनियम’ में बदलाव के लिए था, जिसकेजरिए किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय होती है. इस विधेयक में प्रावधान था कि अफगानिस्तान, बांग्लादेशऔर पकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को ‘अवैध प्रवासी’ नहीं माना जाएगा.’इसका सीधा सा अर्थ ये था कि इसके जरिए बांग्लादेशी हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी जानी थी. अब इस दिशा मेंठोस कदम के रूप में NRC यानि नैशनल रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिजन का पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर की रात सामने आयाहै. इस ड्राफ्ट में असम के कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों को जगह दी गई और उन्हें कानूनी तौर परभारत का नागरिक मान लिया गया है. वहीं बचे हुए लोगों का प्रमाणीकरण हो रहा है, जिसके बाद उनका नाम इसलिस्ट में शामिल किया जाएगा. जो व्यक्ति इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज नहीं करवा पाएंगे या उनके पास इसके लिएज़रूरी कागजात नहीं होगें, उन्हें असम का नागरिक नहीं माना जाएगा और उन्हें देश के बाहर जाना पड़ेगा. 1971 मेंजब पाकिस्तान विभाजन ले पश्चात बांग्लादेश अस्तित्व में आया, उसके बाद से ही असम घुसपैठियों के विषय चर्चितरहने लगा था. असम के रास्ते घुसपैठिये देश में घुसकर देश के प्रत्येक हिस्से में जाकर बसने लगे थे. बांग्लादेश के निर्माणके दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई व वहां की एक बड़ी आबादी भारत आकर बस गई थी, इसमें हिंदुओं के अलावामुस्लिमों की भी बड़ी आबादी थी. 1971 के इस दौर में लगभग 10 लाख बांग्लादेशी असम में ही बस गए. 1971 के बादभी बड़े पैमाने पर बांग्लादेशियों का असम में आना जारी रहा. बांग्लादेश के लोगों की बढ़ती जनसंख्या ने असम केस्थानीय लोगों में भाषायी, सांस्कृतिक व सामाजिक असुरक्षा की स्थितियां उत्पन्न कर दी. घुसपैठिये असम में नाना प्रकारसे अशांति, अव्यवस्था, अपराध व उत्पात मचाने लगे. 1978 में असम के मांगलोडी लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव केदौरान चुनाव आयोग के ध्यान में आया कि इस चुनाव में वोटरों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो गई है. चुनावी गणित वतुष्टिकरण की नीति के चलते सरकार ने 1979 में बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिक बना लिया.असम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सरकारी नीति के विरोध में आन्दोलन हुआ और असम भड़क गया. आसू व अगप को असम की स्थानीय जनता ने बहुतप्यार व समर्थन दिया. छात्र संगठन आसू ने असम आंदोलन के दौरान ही 18 जनवरी 1980 को केंद्र सरकार को एकNRC अपडेट करने हेतु ज्ञापन दिया. इस बड़े व हिंसक आन्दोलन की परिणति 1985 में असम में राजीव गांधी के साथ “असम समझौते” के रूप में हुई. 1999 में वाजपेयी सरकार ने इस समझौते की समीक्षा की और 17 नवंबर 1999 कोतय किया गया कि असम समझौते के तहत NRC को अपडेट किया जाना चाहिए. अटल जी की सरकार जाने के बाद2005 में मनमोहन सरकार भी इस निर्णय पर कायम रही व NRC की समीक्षा हेतु बारपेटा और चायगांव में पायलटप्रोजेक्ट शुरू किया गया. असम के कुछ संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और वहां हिंसा हो गई और असम कीगोगोई सरकार इसमें बेतरह विफल रही. इसके बाद नेता सर्वानंद सोनोवाल ने 2013 में बांग्लादेश के घुसपैठ के मुद्दे कोसुप्रीम कोर्ट में उठाया और न्यायालय ने NRC 1951 को अपडेट करने का आदेश दिया जिसमें 25 मार्च, 1971 से पहलेबांग्लादेश से भारत में आने वाले लोगों को स्थानीय नागरिक माने जाने की बात कही गई थी और उसके बाद के असम मेंपहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेजने के आदेश दे दिए गए थे. सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद ही NRC कीसमीक्षा व अपडेशन का कार्य प्रारम्भ हुआ और 1951 की जनगणना में शामिल अल्पसंख्यकों को राज्य का नागरिक मानलिया गया. 1951 से 25 मार्च, 1971 के बीच असम में आने वाले बांग्लादेशी शरणार्थियों के पास वैध कागजात नहीं थे.एनआरसी को अपडेट करने के दौरान पंचायतों की ओर से जारी नागरिकता प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं दी जा रही थी.इसके बाद मामला असम हाईकोर्ट में पहुंच गया. हाई कोर्ट ने लगभग 26 लाख लोगों के पहचान के दस्तावेज अवैध करारदे दिए. इसके बाद मामला एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया. असम की सर्वानंद सरकार ने न्यायालय केआदेशानुसार 31 दिसंबर 2017 को नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया जिसमेंअसम के कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी तौर पर भारत का नागरिक माना गया. यद्दपिरजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेष ने ड्राफ्ट को जारी करते हुए कहा है कि लोगों कलो घबराना नहीं चाहिए व इसकेबाद और वेरिफिकेशन होगा व और ड्राफ्ट भी जारी होगा. लिस्ट जारी होने के बाद असम सरकार के वित्त मंत्री औरनागरिकता रजिस्टर के इंचार्ज हेमंत विश्व शर्मा ने कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी रजिस्टर में नहीं है, उन्हें हरहाल में देश छोड़ना होगा. अब देखना यह है कि हमारा देश एक दीर्घ प्रतीक्षा के बाद किस प्रकार और कब बांग्लादेशीघुसपैठियों की समस्या से मुक्ति पायेगा.
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भीमा गाँव की हिंसा भारत को बाँटने की साजिश ?
Updated: January 4, 2018
प्रभुनाथ शुक्ल हिंदुस्तान से अंग्रेज़ विदा हो गए , लेकिन फूट डालो और राज करो का बीज़ जो उन्होंने बोया था। वह आज़ पूरे भारत…
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एक वरदान है पुस्तक मेला
Updated: January 4, 2018
-डॉ.सौरभ मालवीय देश की राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में 6 जनवरी से 14 जनवरी तक विश्व पुस्तक मेला आयोजित किया जा रहा है। मेले का उद्घाटन मानव संसाधन…
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अपनी अलग राह बनाता भारत
Updated: January 3, 2018
दुलीचन्द रमन पिछले दिनों अमेरिका ने अपनी 68 पृष्ठों का राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति-2017 दस्तावेज़ प्रकाशित किया हैं जिसमें भारत का आंकलन उभरती हुई वैश्विक शक्ति…
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विश्व व्यापार संगठन और भारतीय कृषि
Updated: January 3, 2018
दुलीचन्द रमन 164 सदस्य देशों वाले विश्व व्यापार संगठन का 11वां मंत्री स्तरीय सम्मेलन अर्जेटिना के ब्यूनेस आयर्स में 13 दिसंबर 2017 को सम्पन्न हो…
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नववर्ष का संकल्प गरीबों की सेवा
Updated: January 3, 2018
डा. राधेश्याम द्विवेदी ऊर्जा का नवीनीकरण :- 2018 का नया साल आ गया। नववर्ष हम सभी के लिए नई उमंगे, नया उत्साह लेकर आता हैं।…
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रजनीकांत राजनीति की एक नई सुबह
Updated: January 3, 2018
– ललित गर्ग- नयावर्ष प्रारंभ होते ही सुपर स्टार रजनीकांत ने सबको चैका दिया। उनकी राजनीति में आने की घोषणा ने जहां राजनीति के क्षेत्र…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-30
Updated: January 3, 2018
राकेश कुमार आर्य   गीता का पांचवां अध्याय और विश्व समाज कर्मयोग श्रेष्ठ या ज्ञानयोग श्रेष्ठ है जैसे आजकल विभिन्न सम्प्रदायों की तुलना करते…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-29
Updated: January 3, 2018
राकेश कुमार आर्य   गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज गीता में आगे गीताकार श्रीकृष्णजी के मुखारविन्द से कहलवाता है कि हे पार्थ!…
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