इंसां हो दरिंदों को ना फिर मात दीजिये….
Updated: January 15, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी आया है नया साल नई बात कीजिये, फिर जिं़दगी की नई शुरूआत कीजिये। ग़म की सियाह रातों से बाहर तो आइये, खु़शियों…
Read moreआंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं….
Updated: January 15, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी कैसे वतन जला उन्हें आता नज़र कहीं, आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं। ज़ालिम है कौन हमको भी यह खूब…
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आसमान में छेद कराते दादाजी
Updated: January 15, 2013
कड़क चाय मुझको पिलवाते दादाजी| काजू या बादाम खिलाते दादाजी| थाली में भर भर कर चंदा की किरणे, मुझे चांदनी में नहलाते दादाजी| …
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दादी बोली
Updated: January 15, 2013
जितनी ज्यादा बूढ़ी दादी, दादा उससे ज्यादा| दादी कहती ‘मैं’ शहजादी, और दादा शह्जादा| दादी का यह गणित, नातियों पोतों को न भाता| बूढ़े लोगों…
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चूहों की चतुराई
Updated: January 15, 2013
देखे जब दो दर्जन चूहे, कंडेक्टर घबराया| सारे थे बस में सवार, पर टिकिट एक कटवाया| बोला दो दर्जन हो तुम सब, सबको टिकिट…
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कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान
Updated: January 15, 2013
अवनीश सिंह माघ मकरगत रवि जब होइ, तीरथ पतिहिः आव सब कोइ। सोमवार को मध्य रात्रि के बाद तीर्थराज प्रयाग में पवित्र संगम के किनारे…
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गुड बाय! टेक केयर!!
Updated: January 14, 2013
सुबह सुबह फिटनेस के बहाने सरोजनी नगर की पटड़ी पर ताक झांक करने निकला था कि डिपो के पास के मंदिर के बाहर समान बांधे…
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सामाजिक उल्लास का पर्व पोंगल
Updated: January 14, 2013
लोक, परिवेश और प्रकृति भी नहाती है उत्सवी धाराओं में अनिता महेचा उत्सव प्रियाः मानवाः यानि मानव उत्सव प्रिय होते हैं। महाकवि कालिदास का यह…
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भूतपूर्व लौहपुरुष के तेवर हो गए लाल
Updated: January 14, 2013
निरंजन परिहार बीजेपी में हड़कंप है। लालकृष्ण आडवाणी अड़ गए हैं। नितिन गड़करी नहीं चलेंगे। संघ परिवार बहुत कोशिश कर रहा है। कोशिश यह कि…
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वियोग – विजय निकोर
Updated: January 13, 2013
सोचता हूँ, चबूतरे पर बैठी अभी भी क्रोशिए से तुम कोई नाम बुनती हो क्या ? ….इसका मतलब ? तो, “क्या” नाम बुनती होगी…
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‘भागवत पुराण’: निगाहें कहीं पर, निशाना कहीं
Updated: January 13, 2013
तनवीर जाफ़री राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महिलाओं के साथ होने वाले दुराचार व बलात्कार के परिपेक्ष्य में पिछले दिनों अपनी यह…
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हिन्दी के मार्क्सवादी आलोचक औैर बुद्धिजीवी
Updated: January 13, 2013
पाण्डेय शशिभूषण ‘शीतांशु’ हिन्दी में मार्क्सवादी आलोचकों ने पिछले पचास वर्षों में साहित्य की भावनक्षमता और पाठकीय संवेदनशीलता को कुंठित-अवरोधित ही किया है। इन सब…
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