राजनीति सेक्स और सियासत का कॉकटेल

सेक्स और सियासत का कॉकटेल

अवनीश सिंह राजनीति को सत्ता, सुंदरी व सियासत का खेल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसका ताजा उदाहरण इस सप्ताह के अंदर लगातार दो…

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हिंद स्‍वराज खबर पक्की है, देश तरक्की कर रहा है

खबर पक्की है, देश तरक्की कर रहा है

अवनीश सिंह (15 अगस्त पर विशेष) हिन्दुस्तान की आजादी को 65 साल से अधिक हो गया। अब हो गया तो हो गया, इसमें हम कर…

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समाज सरकार नहीं चाहती संयुक्त परिवार ?

सरकार नहीं चाहती संयुक्त परिवार ?

लीना यों तो धीरे धीरे हमारे समाज में यूं भी संयुक्त परिवार समाप्त होते जा रहे हैं, कुछ तो देस- विदेश नौकरियों की वजह, तो…

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व्यंग्य आजादी…क्यों मजाक करते हो भाई…

आजादी…क्यों मजाक करते हो भाई…

 हिमांशु डबराल ‘क्या आज़ादी तीन थके हुए रंगों का नाम है जिन्हें एक पहिया ढोता है? या इसका कोई ख़ास मतलब होता है’ धूमिल की…

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कविता व्यंग – कविता:आज़ादी

व्यंग – कविता:आज़ादी

राघवेन्द्र कुमार ”राघव” फहर रहा था अमर तिरंगा जगह युनिअन जैक की | गुजर गयी थी स्याह रात चमकी किस्मत देश की | स्वाधीन हुआ…

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हिंद स्‍वराज संचित भारत की गुलामी से वंचित भारत को कब मिलेगी आज़ादी

संचित भारत की गुलामी से वंचित भारत को कब मिलेगी आज़ादी

इक़बाल हिंदुस्तानी राष्ट्रीय पर्वों पर रस्म अदायगी नहीं गहन चिंतन होना चाहिये! ऐसा क्या हुआ कि 15 अगस्त 1947 को जो सपना इस देश के…

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भोपाल मीडिया चौपाल : एक सार्थक पहल

मीडिया चौपाल से लौटकर आशीष कुमार ‘अंशु’  जब भोपाल से मीडिया चौपाल का ई-मेल मिला था तो आम तौर पर किसी नए आयोजन को लेकर जैसे…

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भोपाल में तय हुआ न्यू मीडिया का रोडमैप

 सामाजिक दायित्व, जबावदेही के साथ आर्थिक पक्ष के लिए जारी हुआ साझा एजेंडा झीलों की नगरी भोपाल न्यू मीडिया की जबाबदेही के साथ ही उसको…

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मीडिया चौपाल : सोशल मीडिया की ‘अगस्त क्रांति’

लोकेन्द्र सिंह राजपूत अगस्त क्रांति का बिगुल सन् १९४२ में भारत से अंग्रेजों को भगाने के लिए फूंका गया था। यूं तो इसे ‘भारत छोड़ो आंदोलन’…

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व्यवस्था परिवर्तन और वर्तमान आंदोलन

विजय कुमार अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध किया जा रहा अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी मंडली भी भंग…

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सार्थक पहल संवैधानिक-मान्यता भोजपुरी का अधिकार है

संवैधानिक-मान्यता भोजपुरी का अधिकार है

 पियूष द्विवेदी ‘भारत’ पिछले संसदीय सत्र में तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम, जिन्हें कभी हिंदी बोलते हुवे भी नही देखा गया, ने जब संसद के अंदर…

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विविधा भुला बैठे हैं स्वाधीनता का स्वाद

भुला बैठे हैं स्वाधीनता का स्वाद

भुला बैठे हैं स्वाधीनता का स्वाद दासता के नवाचार हो रहे हावी डॉ. दीपक आचार्य जिस ज़ज़्बे के साथ स्वाधीनता पाने के लिए हमारे पुरखों…

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