अखिलेश सरकार की उपलब्ध्यिां वास्तविक कम भावनात्मक ज़्यादा!
Updated: October 8, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी कानून व्यवस्था व भ्रष्टाचार के मामले में ’अंकल कैबिनेट‘ नाकाम! सपा सरकार की उपलब्ध्यिों के नाम पर आज देखा जाये तो जो वादे…
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राबर्ट लीला के फेर में टीम केजरीवाल
Updated: October 8, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम राजनीति का चोला ओढ़कर अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने पहले ही वार में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है| हालांकि जिस मुद्दे…
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मोबाईल का आर्डर
Updated: October 8, 2012
सुबह ‘चार’ पर मुर्गे उठकर, हर दिन बाँग लगाते थे| सोने वाले इंसानों को, “उठो उठो “चिल्लाते थे| किंतु आजकल भोर हुये, आवाज़ नहीं…
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तुलसी चौरा मुस्कराता
Updated: October 8, 2012
बिल्ली को मौसी कहते हैं , और गाय को हम माता| यही हमारे संस्कार हैं, पशुओं तक से है नाता| चिड़ियों को देते हैं…
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आप ही ले जाएगा ।
Updated: October 8, 2012
मैं अकेला दर्द इतना साथ लेकर क्या करूँ आधा तुम ले लो जहां हो आधा तो कट जाएगा । जब पड़ी लानत की नजरें चुप…
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मां
Updated: October 8, 2012
गरम तवे पर रोटी जैसी, हर दिन सिकती रहती मां| फिर भी मटके के जल जैसी ,शीतल दिखती रहती मां| चेहरे पर मुस्कान बिखेरे…
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चुहिया की नसीहत
Updated: October 8, 2012
सुबह सुबह चूहे ने कर दी, सिगरेट की फरमाइश| बोला चुहिया से, लेकर आ, अच्छी सी सिगरेट बस| लंबा एक लगाऊँगा कस, बड़ा मजा आयेगा|…
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बड़े बुजुर्गों के चरणों में
Updated: October 8, 2012
जब से हुई दोस्ती उसकी मच्छरजी के साथ मक्खी उससे हर दिन करती मोबाईल पर बात। हाय हलो करते करते वह हँसती जाती है कहती…
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मत करना मनमानी
Updated: October 8, 2012
हाथी दादा थे जंगल में सबसे वृद्ध सयाने, डरे नहीं वे कभी किसी से किये काम मनमाने। आया मन तो सूंड़ बढ़ाकर ऊँचा पेड़…
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गौरवर्णी बादलों की बात
Updated: October 8, 2012
लग रहा है यह समय का फेर सा है, बादलों में अब प्रदूषण ढेर सा है। अब गुलाबी और कपसीली बदलियाँ लापता हैं, न…
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मेंढक मामा
Updated: October 8, 2012
क्यों न सच्ची बात बताते| मेंढक मामा क्यों टर्राते| डबरों में पानी कम है तो, बादल को क्यों नहीं बुलाते? यदि नहीं बरसा पानी तो…
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जंगल
Updated: October 8, 2012
पीपल नीम आम के जंगल होते बड़े काम के जंगल | कितने निश्छल भोले भाले होते तीर कमान के जंगल | कभी कभी क्यों हो…
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