धर्म-अध्यात्म करुणा, शांति और आत्मजागरण के प्रकाशस्तंभ हैं गौतम बुद्ध

करुणा, शांति और आत्मजागरण के प्रकाशस्तंभ हैं गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था, वे एक राजकुमार थे, किन्तु जीवन के दुख-जरा, व्याधि और मृत्यु ने उनके अंतर्मन को विचलित कर…

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समाज ट्रेंड बनाम सत्य: ब्राह्मण समाज पर बढ़ती कटुता और इतिहास की अनदेखी

ट्रेंड बनाम सत्य: ब्राह्मण समाज पर बढ़ती कटुता और इतिहास की अनदेखी

भारतीय सभ्यता में ब्राह्मण समाज का योगदान केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रहा है। यह वह वर्ग रहा है जिसने ज्ञान, शिक्षा, दर्शन और राष्ट्र की…

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कला-संस्कृति गौतम बुद्ध के उपदेश और आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता

गौतम बुद्ध के उपदेश और आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता

शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियों को ‘पुष्करणी तिथियाँ’ कहा जाता है। मान्यता है कि एकादशी को अमृत प्रकट…

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समाज “दोष का दर्पण:  हर बुराई के लिए केवल सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक” ?

“दोष का दर्पण:  हर बुराई के लिए केवल सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक” ?

स्वच्छता का उदाहरण अत्यंत स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि हमारे शहर साफ-सुथरे हों, नालियाँ स्वच्छ हों, सड़कें चमकती रहें लेकिन जब वही नागरिक घर…

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आर्थिकी UAE का OPEC से अलगाव: अवसर या संकट?

UAE का OPEC से अलगाव: अवसर या संकट?

यूएई के इस कदम का वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। सबसे पहले, ओपेक की सामूहिक शक्ति कमजोर होगी, जिससे उत्पादन अनुशासन में गिरावट आ सकती है। दूसरा, यूएई अब स्वतंत्र रूप से उत्पादन बढ़ा सकता है, जिससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आएगी। 

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आर्थिकी बदलते भारत की नई आर्थिक तस्वीर: वैश्विक अमीरों का नया ठिकाना बना मुंबई

बदलते भारत की नई आर्थिक तस्वीर: वैश्विक अमीरों का नया ठिकाना बना मुंबई

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर अपनी एक अलग और मज़बूत पहचान बनाई है। तकनीक, नवाचार और पूंजी बाज़ारों में…

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लेख मजदूर दिवस की कहानी : इतिहास, संघर्ष और अधिकारों की दास्तां

मजदूर दिवस की कहानी : इतिहास, संघर्ष और अधिकारों की दास्तां

   19वीं सदी में अमेरिका सहित कई देशों में मजदूरों से 14 से 18 घंटे तक काम कराया जाता था। काम के घंटों का कोई निश्चित नियम नहीं था। महिलाएं…

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विश्ववार्ता हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक: शांति, सौहार्द और संवाद की टेबल पर वार्ता से ही सबकुछ संभव !

हिल्टन होटल में गोलीबारी-निंदनीय और अफसोसजनक: शांति, सौहार्द और संवाद की टेबल पर वार्ता से ही सबकुछ संभव !

हरहाल, यहां यह कहना ग़लत नहीं होगा कि पिछले कुछ समय से दुनियाभर में ट्रंप की नीतियों के आलोचकों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ…

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राजनीति हुल्लफाड़ सच है- बंगाल में ममता-राज का सूर्यास्त और भगवा सूर्योदय!

हुल्लफाड़ सच है- बंगाल में ममता-राज का सूर्यास्त और भगवा सूर्योदय!

2026 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा बंगाल आज जिस ज्वालामुखी पर बैठा है, वह फटने को तैयार है। ममता बनर्जी ने अपनी सत्ता…

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पर्यावरण मछलियों में ’’कोकीन’’ की लत, प्रकृति को तबाह तो नहीं कर देगी?

मछलियों में ’’कोकीन’’ की लत, प्रकृति को तबाह तो नहीं कर देगी?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में पर्यावरण विषविज्ञानी जैक ब्रांड ने स्वीडन में मछलियों पर एक खास रिसर्च शुरू की। उन्होंने यह देखने के…

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पर्यावरण तपती धरती : कारण और समाधान

तपती धरती : कारण और समाधान

सके अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसों से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। इसने  हीटवेव की तीव्रता और इसकी अवधि दोनों को ही बढ़ा दिया है। बताया जा…

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लेख श्रम का सम्मान, समानता का संधान: सरकारी-निजी वेतन का समान विधान

श्रम का सम्मान, समानता का संधान: सरकारी-निजी वेतन का समान विधान

जब हम न्यूनतम वेतन की अवधारणा की बात करते हैं, तो इसका मूल उद्देश्य कामगार को जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं—रोटी, कपड़ा और मकान—के साथ-साथ गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत करने का अधिकार देना होता है। सरकारी क्षेत्र में न्यूनतम वेतन का निर्धारण सातवें वेतन आयोग

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