Tag: India

राजनीति

अमेरिका ने दिखाया पाकिस्तान को आइना

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अमेरिका ने भी आतंकवाद के दंश को करीब से भोगा है। इसके साथ ही विश्व के अनेक देशों ने भी इस्लामिक आतंकवाद का साक्षात्कार किया है। वर्तमान में यह पूरी दुनिया जान चुकी है कि आतंकवाद कितना खतरनाक होता है। कश्मीर घाटी में भारत आतंकवाद को लम्बे समय से भोग रहा है। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर सहित भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को दोषी ठहराया है।

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विविधा

ताकत भी है बढ़ती आबादी

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प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक विविधता, ऋतुओं कि विलक्षण्ता और अनुकूल जलवायु के चलते हम बेहद समृद्धशाली देश हैं। नतीजतन देश के हर क्षेत्र में खेती योग्य भूमि, पानी, वन संपदा और अनेक प्रकार के खनिज संसाधनो के विपुल भंडार हैं। खाद्यान्न के क्षेत्र में भी हम आत्मनिर्भर हैं। हालांकि जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में 2024 तक हम इस निर्भरता को खो भी सकते हैं। क्योंकि हमारी खाद्यान्न की आज जरूरतें 20 करोड़ टन हैं, वही 2020 में इसकी जरूरत 40 करोड़ टन होगी। लेकिन संसाधनों के बंटवारे में हम समानता का रुख अपनाने वाली नीतियों को अमल में लाएं तो इस समस्या से भी निजात पा सकते हैं। इसके लिए हमें प्राकृतिक संपदा को उधोगपतियों के हवाले करने की बजाए, विकेंदीकृत करके बहुसंख्यक आबादी के हवाले करने की जरूरत है।

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विविधा

एनएसजी के मुद्दे पर भारत का पैंतरा

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दरअसल चीन के अपने स्वार्थ हैं। चीन अपने परमाणु कारोबार को बड़े स्तर पर फैलाना चाहता है। पिछले दो दशक में वह अनेक परमाणु इकाइयां भी स्थापित कर चुका है। गोया, भारत यदि परमाणु संपन्न शक्ति के रूप में उभर आता है तो चीन का परमाणु बाजार प्रभावित होगा। इसलिए चीन कह रहा है कि भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और ईरान को को भी एनएसजी की सदस्यता दी जाए। दरअसल चीन की अंदरूनी मंशा पाकिस्तान में अपने परमाणु केंद्र स्थापित करने की है। इस लिहाज से अमेरिका समेत आतंकवाद विरोधी देशों की आषंका है कि पाक जिस तरह से आतंकवाद की गिरफ्त में है

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विश्ववार्ता

चीनः भारत कोप-भवन में क्यों बैठे?

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वह क्षेत्र कानूनी तौर पर भारत का है। यह भारतीय संप्रभुता का उल्लंघन है। यह बात कागजी तौर पर सही है लेकिन सच्चाई क्या है? भारत की सरकार ने इस क्षेत्र को वापस लेने के लिए आज तक क्या किया है? कुछ नहीं। वह कभी उसे लेने का दावा भी नहीं करती। मुझे खुशी है कि सुषमा स्वराज आजकल उसके बारे में कभी-कभी बोल देती हैं। हमारे नेताओं को शायद पता नहीं है कि 1963 में हुए एक समझौते के तहत पाक ने चीन को इस क्षेत्र की 5180 वर्ग किमी जमीन भेंट कर दी थी। भारत इस समझौते को गैर-कानूनी मानता है। नेताओं को यह भी पता नहीं होगा कि इस समझौते की धारा 6 में कहा गया है कि कश्मीर-समस्या का स्थायी हल निकलने पर इस पर पुनर्विचार होगा।

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विश्ववार्ता

चीन की बेचैनी

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दीगर मुल्कों में भारतीय प्रोडक्ट क्वालिटी और साख में चीन के माल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जिससे चीन बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। चीन की चीप-टाइप बिजनेस ट्रिक्स के कारण कई मुल्कों के साथ तो उसके कारोबार और मुनाफे में गिरावट भी आई है। कुछ माह पहले, चीन ने कुछ अफ्रीकी देशों में अपने कारोबार को भारत से कड़ी चुनौती मिलने के बाद वहां भारतीय प्रोडक्ट्स को बदनाम करने की मुहिम छेड़ दी थी, और ‘मेड इन इंडिया’ के नकली ठप्पे लगाकर बड़े पैमाने पर अपना घटिया माल बाज़ार में उतार दिया था। ज़ाहिर है बिजनेस में सीधे ढंग से भारत का मुकाबला न कर पाने के कारण चीन खामख्वाह अरुणाचल जैसे मुद्दे उठाकर इसकी बांहें मरोड़ने की चाल चल रहा है।

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