महत्वपूर्ण लेख शब्दों में छिपा हमारा सांस्कृतिक इतिहास January 11, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 15 Comments on शब्दों में छिपा हमारा सांस्कृतिक इतिहास डॉ. मधुसूदन (एक) शब्दों में इतिहास की खोज: सोचा न था, ऐसा छिपा हुआ सांस्कृतिक इतिहास इन शब्दों के पीछे होगा. जिसे पाकर मैं स्वयं हर्षित ही नहीं चकित भी हूँ; और धन्यता अनुभव कर रहा हूँ. इतिहास उजागर करने के लिए जैसे भूमि का खनन कर अवशेष ढूँढे जाते हैं. और उन अवशेषों के […] Read more » Featured सांस्कृतिक इतिहास
महत्वपूर्ण लेख विविधा हिन्द-प्रंशात क्षेत्र में भारत की भूमिका January 9, 2018 / January 9, 2018 by दुलीचंद कालीरमन | Leave a Comment दुलीचन्द रमन समय बदलता है तो परिवर्तन हर जगह दिखाई देता है। अंतराष्ट्रीय संबंध भी इससे अछूते नही है। कभी विश्व स्तर पर अमेरिका और सोवियत संघ के रूप में शक्ति के दो केन्द्र थे। बाकी के देशों ने अपनी सुविधानुसार अपने-अपने पाले चुन लिये थे। संघर्ष का केन्द्र भी अमूमन यूरोप ही था। नाटो […] Read more » prashant mahasagar भारत की भूमिका हिन्द-प्रंशात क्षेत्र
महत्वपूर्ण लेख विविधा मानव निर्मित है रामसेतु December 20, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः अमेरिकी वैज्ञानिकों एवं पुरावेत्ताओं ने रामसेतु सेतु को मानव निर्मित माना प्रमोद भार्गव दुनिया भर के वैज्ञानिक और पुरावेत्ता अब यह मानने को मजबूर हो रहे है कि भारत और श्रीलंका के बीच स्थिित रामसेतु अर्थात ‘एडम्स ब्रिज‘ मानव निर्मित है। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रामेश्वरम के निकट स्थित पमबन और श्रीलंका के मन्नार […] Read more » मानव निर्मित मानव निर्मित है रामसेतु रामसेतु राष्ट्रीय धरोहर सेतु समुद्रम परियोजना
आर्थिकी महत्वपूर्ण लेख राजनीति चाबहार बंदरगाह एक बड़ी उपलब्धि December 7, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव पाकिस्तान और चीन की सभी कूटनीतियों को दरकिनार करते हुए भारत ईरान के रास्ते पहुंचने वाले वैकल्पिक मार्ग, अर्थात चाबहार बंदरगाह को शुरू कराने में सफल हो गया है। भारत सरकार दो लाख करोड़ के पूंजी निवेश से इस बंदरगाह पर पांच गोदियों का निर्माण कर रहा है, इनमें से दो बनकर तैयार […] Read more » Chabahar port Chna Featured gwadar Port India pakistan चाबहार बंदरगाह
महत्वपूर्ण लेख विविधा भाषा रूढ कैसे की जाए? December 2, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 19 Comments on भाषा रूढ कैसे की जाए? डॉ. मधुसूदन प्रवेश: प्रश्न उठाया जाता है, कि, हिन्दी की श्रेष्ठता और उपयोगिता प्रमाणित होने पर भी भारत की जनता और संचार माध्यम हिन्दी क्यों अपनाते नहीं ? कुछ मित्रों को लगता है; कानून बनानेसे हिन्दी प्रस्थापित हो जाएगी. आज, ऐसे कुछ पहलुओं के उत्तर खोजने का प्रयास करते हैं. विषय प्रश्नोत्तर मालिका द्वारा प्रस्तुत […] Read more » Featured शब्द रूढ संस्कृत
महत्वपूर्ण लेख विविधा क्या कश्मीर में बकरा पार्टी की लडाई अपने अंतिम दौर में पहुँच गई है ? June 26, 2017 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment कश्मीर घाटी के मुसलमानों की जनसंख्या भी ,मौलाना के शब्दों का ही सहारा लेना हो तो , 95 प्रतिशत हिन्दुओं की औलाद है और पाँच प्रतिशत उन मुसलमानों की ,जिनके पूर्वज कश्मीर को जीतने आए थे और उसे जीत कर यहीं बस गए । जीत कर यहीं बसने वाले अपनी पहचान छिपाते भी नहीं । वे गौरव से उसका प्रदर्शन करते हैं । Read more » Featured अयूब पंडित कश्मीर कश्मीर घाटी में बकरा पार्टी कश्मीरियों की शेर पार्टी बकरा पार्टी लेफ्टीनेंट उमर फैयाज
महत्वपूर्ण लेख विविधा साम्यवादी गढ़ों में योग का उत्सव June 20, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment इस बार पूंजीवादी देश अमेरिका के नेशनल माॅल में हजारों लोग योग दिवस मनाएंगे। अमेरिका में ही नहीं दुनिया योग आंदोलन, तमाम राजनीतिक और आर्थिक आंदोलनों को पीछे छोड़ता जा रहा है। योग शब्द अपने भावार्थ में आज अपनी सार्थकता पूरी दुनिया में सिद्ध कर रहा है। योग का अर्थ है जोड़ना। वह चाहे किसी भी धर्म जाति अथवा संप्रदाय के लोग हों, योग का प्रयोग सभी को शारीरिक रूप से स्वास्थ्य और मानसिक रूप से सकारात्मक सोच विकसित करता है। Read more » Featured yoga in european countries yoga spreading happiness yoga spreading in communist countries योग का उत्सव
महत्वपूर्ण लेख शख्सियत समाज सावरकर May 29, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे। Read more » Featured Savarkar Veer Savarkar सावरकर
महत्वपूर्ण लेख समाज भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ? May 13, 2017 / May 13, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व […] Read more » Featured भारत भारत का इस्लामीकरण भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण मुस्लिम तुष्टीकरण मुस्लिम देशों में मुसलमानों की हालत हज सब्सिडी हज सब्सिडी में घोटाले
महत्वपूर्ण लेख राजनीति कांग्रेस रानी की दुर्दशा पर दासी वामपंथियों का विधवा-विलाप March 12, 2017 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment मनोज ज्वाला १४ अगस्त सन १९४७ की आधी रात को दिल्ली में हुआ सत्ता-हस्तान्तण वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिनिधि लार्ड माउण्ट बैटन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू के बीच हुई एक दुरभिसंधि का परिणाम एवं एक सियासी साजिस का क्रियान्वयन था । भारत पर अंग्रेजों की सत्ता को कायम […] Read more » Featured कांग्रेस की दुर्दशा कांग्रेस रानी की दुर्दशा वामपंथियों का विधवा-विलाप
महत्वपूर्ण लेख विविधा अमेरिका में बढ़ती नस्लीय नफरत February 28, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव प्रवासी मुक्त अमेरिका के मुद्दे पर चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवसरों की भूमि माने जाने वाले अमेरिका में नस्लीय भेद हिंसा का रूप लेने लगा है। इस हिंसा के पहले शिकार दो भारतीय युवा इंजीनियर हुए हैं। इनमें से हैदराबाद के एक श्रीनिवास कुचिवोतला की मौके […] Read more » Featured अमेरिका अमेरिकी नागरिक इयान ग्रिलोट अमेरिकी नौसैनिक एडम पुरिनटोन डोनाल्ड ट्रंप बढ़ती नस्लीय नफरत श्रीनिवास की पत्नी सुनैना दुमला श्रीनिवास कुचिवोतला हैदराबाद
जन-जागरण महत्वपूर्ण लेख समाज कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना February 26, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment परिस्थिति के हिसाब से किसानों के तर्क व्यावहारिक हैं। उनकी बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे केचुंआ खाद, कचरा कम्पोस्ट आदि से परिचित नहीं है। गोबर गैस प्लांट उनकी पकड़ में नहीं है। हरी खाद पैदा करने के लिए हर साल जो अतिरिक्त खेत चाहिए, उनके पास उतनी ज़मीन नहीं है। ज़िला कृषि कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी गांव में आते-जाते नहीं। सच यही है कि जैविक खेती के सफल प्रयोगों की भनक देश के ज्यादातर किसानों को अभी भी नहीं है। Read more » Featured बी आॅर्गेनिक बी नैचुरल बी वैल्दी मुश्किल है कुदरती हवा रासायनिक हुई माटी-खेती रिमेन हैल्दी