Category: समाज

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 ट्रिपल तलाक़:संस्थागत धर्म की सीमाएं तय करना जरूरी

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इंस्टैंट ट्रिपल तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय प्रक्रिया की बारीकियों के आधार पर मूल्यांकन करने पर एक संतुलित और तकनीकी दृष्टि से परिपूर्ण परंपरागत फैसला है किन्तु अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण यह ऐतिहासिक बनते बनते रह गया है। सर्वप्रथम पांच जजों की बेंच द्वारा दिए गए फैसले पर नज़र डालना आवश्यक है। […]

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शाहबानो से शायरा बानो तक

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यह बड़ा ही शर्मनाक तथ्य है कि जो तीन तलाक पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक देश में 1961 में प्रतिबंधित हो गया  और पच्चीसों अन्य अरब-इस्लामिक देशों में दशकों से प्रतिबंधित है वही तीन तलाक भारत में आज भी शाहबानों से लेकर शायरा बानों तक कछुआ चाल से ही पहुँच पाया है. शायरा बानो वह मुस्लिम […]

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