समाज आखिर किसानों को गुस्सा क्यों आया ? June 7, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment भाजपा ने लोकसभा चुनाव के घोषणा-पत्र में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और किसानों को उपज का लागत से डेढ़ गुना दाम दिलाने का वादा किया था। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई उल्लेखनीय पहल नहीं हुई। इसके उलट विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले की तुलना में कम ही बढ़े हैं। Read more » farmer dying out of debt farmrers in debt Featured अन्नदाता किसानों को गुस्सा
समाज उत्तर प्रदेश की उच्च मेडिकल शिक्षा June 6, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment हर साल देश भर में 55,000 डॉक्टर अपना एमबीबीएस और 25,000 पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करते है। विकास की इस दर के साथ, वर्ष 2020 तक 1.3 बिलियन आबादी के लिए भारत में प्रति 1250 लोगों पर एक डॉक्टर (एलोपैथिक) होना चाहिए और और 2022 तक प्रति 1075 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए (जनसंख्यारू 1.36 बिलियन)। दूसरे विशेषज्ञ का कहना है कि, “हालांकि, समिति को सूचित किया गया है। एक रात में डॉक्टर नहीं बनाया जा सकता है और यदि हम अगले पांच सालों तक हर साल 100 मेडिकल कॉलेज जोड़ते हैं तभी वर्ष 2029 तक देश में डॉक्टरों की संख्या पर्याप्त होगी।“ Read more » Featured उच्च मेडिकल शिक्षा उत्तर प्रदेश
समाज सार्थक पहल जिम्मेदारी का घड़ा और स्वच्छता की पहल June 5, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार गर्मी की तपन बढऩे के साथ ही अनुपम मिश्र की याद आ गयी. उनके लिखे को एक बार फिर पढऩे का मन किया. उनको पढ़ते हुए मन में बार बार यह खयाल आता कि वे कितनी दूर की सोचते थे. एक हम हैं कि कल की भी सोच पाने में समर्थ नहीं है. […] Read more »
समाज सार्थक पहल मुचकुंद दूबे के लालन शाह June 5, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment प्रो. मुचकुंद दूबे ने हिंदी में वह काम कर दिखाया है, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर ने लालन शाह फकीर के लिए बांग्ला में किया था। लालन शाह एक बाउल संत थे, जिनका जन्म 1774 में हुआ माना जाता है और निधन 1890 में याने उन्होंने 116 साल की उम्र पाई। आज बांग्लादेश के घर-घर में उनके […] Read more » Featured Hindi Translation of Bengali Songs of Lalan Shah Fakir Muchkund Dubey Shri Pranab Mukherjee receiving a copy of the book of Hindi Translation of Bengali Songs of Lalan Shah Fakir by Prof. Muchkund Dubey and a DVD of the Songs The President मुचकुंद दूबे लालन शाह
समाज जानिए की आखिर क्यों अशुभ हैं फटी हुई जींस पहनना..??? June 5, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment इस तरह के कपड़े पहनकर आप अपने फ्रेंड्स के बीच भले ही अच्छे लगें लेकिन ये आपके गुड लक को बैड लक में बदल सकता है। इस तरह के कपड़े पहनना दरिद्रता को न्योता देता है। यह सिर्फ बाहर जाने को लेकर ही बुरा नहीं माना जाता बल्कि अगर घर पर हैं या घर से ही काम कर करते हैं तो भी आपको फटे और पुराने कपड़े नहीं पहनने चाहिए। Read more » अशुभ हैं फटी हुई जींस पहनना फटी हुई जींस
समाज धार्मिक आस्था पर आघात की घृणित राजनीति June 5, 2017 by विनोद कुमार सर्वोदय | Leave a Comment भारतीय संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करके भूमि पुत्र बहुसंख्यक हिंदुओं की आस्थाओं पर निरंतर प्रहार करते रहने की मुगलकालीन परंपरा अभी जीवित है। आज केंद्र में राष्ट्रवादी भाजपानीत राजग सरकार के सशक्त शासन में भी देशद्रोहियों व भारतविरोधियों के षड्यंत्रो पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह कितना विचित्र है कि जिस “कांग्रेस” ने आरंभ […] Read more » Featured कत्लगाह गाय गाय को "राष्ट्रीय पशु" धार्मिक आस्था बूचड़खाने बैल व बछड़े स्लाटर हाउस
परिचर्चा समाज सार्थक पहल पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी June 5, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment “जब मैं छोटा था बहुत बारिश और बर्फ होती थी। मई के अंत तक पहाड़ बिल्कुल सफेद रहते थे। लेकिन अब बर्फ बहुत ही कम हो गए हैं। सफेद की जगह हरे नजर आते हैं। क्योंकि बारिश ज्यादा होने लगी है”। ये वाक्य है लद्दाख के फ्यांग गांव में रहने वाले 80 वर्षीय टुंडुप वांगाईल का। इसी गांव के 51 वर्षीय रींचेन वांगड़ूज़ बताते हैं कि “साल दर साल वाहनो से निकलने वाले धुंए के कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है”। Read more » पर्यावरण पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी
समाज गरीबी के दुश्चक्र में इतनी बड़ी आबादी क्यों ? June 3, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हम दिशा हीन शैली एवं दिशा हीन मार्ग पर कार्य कर रहे हैं। जिसके परिणाम आज यह दिखाई दे रहे हैं। एक लम्बी लाइन खिंची हुई है। एक तरफ धनाड्य एवं सम्पन्न व्यक्तियों की टोली एवं दूसरी तरफ गरीबों,दुर्बलों, मजलूमों की भयंकर भीड़।... मात्र कुछ लोगों की संपन्नता को आधार मानकर यदि हम देश की रूप रेखा को खींचना आरम्भ करते हैं तो यह देश एवं देश की जनता के प्रति शायद न्याय नहीं होगा।... इसका प्रतिरूप एवं प्रतिमान उसी ट्रेन की भाँति होगा जो मात्र इंजन की प्रबलता पर ध्यान केंन्द्रित करके किया गया। Read more » गरीबी
समाज भारत में जाति-सीमा को लांघना दो राष्ट्रों की सीमाओं का लांघना है! June 3, 2017 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on भारत में जाति-सीमा को लांघना दो राष्ट्रों की सीमाओं का लांघना है! सजा-दलित पत्नी से विवाह से आहत पति की आत्महत्या! लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ पंजाब के संगरूर में एक 22 वर्षीय यवुक ने अपनी शादी के महज एक हफ्ते बाद केवल इस कारण आत्महत्या कर ली। क्योंकि उसे शादी के बाद पता चला कि उसकी पत्नी दलित जाति की है। पंजाब के संगरूर निवासी […] Read more » Featured जाति-सीमा दलित पत्नी से विवाह से आहत पति की आत्महत्या मनप्रीत सिंह
समाज अब छोड़ भी दीजिये न तम्बाकू May 31, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment तंबाकू कंपनियों के कचरे और आपराधिक विश्लेषण बताते हैं तंबाकू के दुष्प्रभाव सिर्फ शारीरिक नहीं है, पर्यावरणीय और सामाजिक भी है। भारत में ज्यादातर किशोर जिज्ञासावश, बङों के अंदाज से प्रभावित होकर, दिखावा अथवा दोस्तों के प्रभाव में पङकर तंबाकू के शिकार बनते हैं। कम उम्र में तंबाकू के नशे में फंसने वाले नियम-कायदों को तोङने से परहेज नहीं करते। ऐसे किशोर मन में अपराधी प्रवृति के प्रवेश की संभावना अधिक रहती है। ऐसे चौतरफा दुष्प्रभाव...चौतरफा रोकथाम की मांग करते हैं। ऐसे प्रयास हुए भी हैं, लेकिन नतीजे अभी भी नाकाफी ही हैं । Read more » Featured तम्बाकू
समाज प्रयास, उपलब्धि और सफलता May 30, 2017 by संचित पुरोहित | Leave a Comment मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति से निपटने का हौसला और दुस्साहस हमारे अंदर होना चाहिए । जब तक हम जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों ने नहीं गुजरेंगे, तब तक जीवन के सर्वोत्तम पहलुओं को पा लेने की कल्पना भी हमारे लिये असंभव है । क्योंकि, विजेता कभी मैदान नहीं छोडते और जो मैदान छोड देते हैं, वे कभी विजेता नहीं बन सकते । स्मरण रहे, कहने को तो जल से मृदु कुछ भी नहीं, लेकिन उसके बहाव के वेग से बडी-बडी चट्टानें तक टूट जाती हैं । एक विद्यार्थी के जीवन में भी ऐसा प्रयास होना चाहिए - यदि उसे कुछ समझ न आये तो सवाल करे, सहमत न होने की स्थिति मंे चर्चा करे । कोई बात नापसंद हो तो उसे विनम्रतापूर्वक नकारें, लेकिन मौन रहकर आत्म निर्णय कर लेना तो एकदम गलत है । Read more » उपलब्धि प्रयास सफलता
महत्वपूर्ण लेख शख्सियत समाज सावरकर May 29, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे। Read more » Featured Savarkar Veer Savarkar सावरकर