व्यंग्य साहित्य परबुद्ध सम्मेलन September 18, 2017 by विजय कुमार | 1 Comment on परबुद्ध सम्मेलन मैं दोपहर बाद की चाय जरा फुरसत से पीता हूं। कल जब मैंने यह नेक काम शुरू किया ही था कि शर्मा जी का फोन आ गया। – वर्मा, पांच बजे जरा ठीक-ठाक कपड़े पहन कर तैयार रहना। दाढ़ी भी बना लेना। एक खास जगह चलना है। वहां से रात को खाना खाकर ही लौटेंगे। […] Read more » Featured परबुद्ध सम्मेलन
कविता हरसिंगार September 17, 2017 / September 18, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment हरसिंगार की ख़ुशबू कितनी ही निराली हो चाहें रात खिले और सुबह झड़ गये बस इतनी ज़िन्दगानी है। जीवन छोटा सा हो या हो लम्बा, ये बात ज़रा बेमानी है, ख़ुशबू बिखेर कर चले गये या घुट घुट के जीलें चाहें जितना। जो देकर ही कुछ चले गये उनकी ही बनती कहानी है। प्राजक्ता कहलो या पारितोष कहो केसरिया डंडी श्वेत फूल की चादर बिछी पेड़ के नीचे वर्षा रितु कीबिदाई है शरद रितु की अगवानी है। अब शाम सुबह सुहानी हैं। Read more » हरसिंगार
कविता मैं भी तो आगे बढ़ नहीं पायी September 17, 2017 / September 18, 2017 by अनुप्रिया अंशुमान | 5 Comments on मैं भी तो आगे बढ़ नहीं पायी जब गुजरती हूँ उन राहों से, मेरी तेज धड़कने आज भी तेरे होने का एहसास करा जाती है । जब गुज़रती हूँ उन गलियों से, मेरे खामोश कदमों से भी आहट तुम्हारी आती है । देखो… देखो …. उन सीढ़ियों पर बैठकर, तुम आज भी मेरा हाथ थाम लेते हो; देखो …. […] Read more » आगे बढ़ नहीं पायी
लेख हिंदी दिवस आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया September 15, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज हिन्दी दिवस पर- मनमोहन कुमार आर्य आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान […] Read more » धर्मभाषा हिन्दी
लेख हिंदी दिवस शैक्षिक परिदृष्य में विस्थापित होती हिन्दी September 13, 2017 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on शैक्षिक परिदृष्य में विस्थापित होती हिन्दी प्रमोद भार्गव वर्तमान वैष्विक परिदृष्य में हिन्दी अनेक विरोधाभासी स्थितियों से जूझ रही है। एक तरफ उसने अपनी ग्राह्यता तथा तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध करके वैष्विक विस्तार पाया है और वह दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। इसीलिए यह जनसंपर्क और बाजार की उपयोगी भाषा बनी हुई है। […] Read more » Featured शैक्षिक परिदृष्य में विस्थापित होती हिन्दी
लेख हिंदी दिवस हिंदी का राजनैतिक व मानसिक विरोध ? September 13, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | 1 Comment on हिंदी का राजनैतिक व मानसिक विरोध ? मृत्युंजय दीक्षित हिंदी भारत की सबसे अधिक प्राचीन,सरल, लचीली ,लोकप्रिय व सीखने में आसान भाषा है। हिंदी का इतिहास भी बहुत ही प्राचीन है। हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। इसलिये यह भाषा देवनागरी लिपि भी कही जाती है। देवनागरी में 11 स्वर और 33 व्यंजन भी होते हंै। हिंदी भाषा का अब […] Read more » Featured हिंदी हिंदी को राष्ट्रभाषा
लेख पर्यटकों को आकर्षित करता अद्भुत बिहार September 12, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment बिहार की धरती पुराविदों एवं ऐतिहासिक अन्वेषकों के विशिष्ट आकर्षक का केन्द्र है। मनोज कुमार पटना- अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक पृष्टभूमि,पुरातात्विक अवशेष,सांस्कृतिक विरासत,प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक साहिष्गुता के बल पर बिहार देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में पूरी तरह सक्षम है। बिहार की धरती पुराविदों एवं ऐतिहासिक अन्वेषकों के विशिष्ट आकर्षक का केन्द्र […] Read more » Bihar Tourists destination Featured ककोलत जलप्रपात कुंडलपुर बिहार राजगीर
लेख शख्सियत हिंदी साहित्य में नारी चेतना महादेवी वर्मा September 11, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 11 सितम्बर पुण्य तिथि पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित हिंदी साहितय जगत की महान लेखिका महादेवी वर्मा का साहित्य जगत में उसी प्रकार से नाम है जैसे कि मुंशी प्रेमचंद व अन्य साहित्यकारों का। महादेवी वर्मा ने केवल साहित्य ही नहीं अपितु काव्य समालोचना संस्मरण संपादन तथा निबंध लेखन के क्षेत्र मं प्रचुरकार्य कया है अपित […] Read more » death anniversary of Mahadevi verma Featured Mahadevi verma महादेवी वर्मा
लेख साहित्य पित्तरों अर्थात पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक श्राद्ध September 10, 2017 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय परम्परा में प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ करने के पूर्व परमात्मा, माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार अथवा प्रणाम करने की परिपाटी है। यह एक प्रकार से जगतपालक ईश्वर व अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा , कृतज्ञता प्रकट करना है कि ईश्वर की असीम अनुकम्पा से हम अपने इन्हीं पूर्वजों की वंश परम्परा के […] Read more » Featured पित्तरों पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा श्रद्धा का प्रतीक श्राद्ध श्राद्ध
कविता साहित्य जिन आँखों के तारे थे हम उन आँखों में पानी है ! September 8, 2017 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment जिन आँखों के तारे थे हम उन आँखों में पानी है ! सुलगते हुये रिस्तो की सच्ची यही कहानी है ! जरा सी चोट लगी जब हमको माँ कितना रोई थी ! सूखे में हमें सुलाया खुद गीले में सोई थी ! ऐसी माँ की क़द्र ना करना क्या बात नहीं बेईमानी है ! सुबह […] Read more » आँखों के तारे
कविता सुरमई शाम ढल रही है September 7, 2017 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment राकेश कुमार सिंह सुरमई शाम ढल रही है, बेताबियाँ सीने पर, नस्तर चला रही है, आज फिर से उनका, ख्याल आ रहा है ! भोली सूरत, कजरारी आँखे, जुल्फें ऐसी, बादल भी सरमाये, उनकी यादो का, उन मुलाकातों का, प्यारा सरमाया, बेजार कर रहा है ! पहचान वो बर्षो पुराना, रवां हो रहा है, ख्यालो […] Read more » शाम
व्यंग्य शपथ ग्रहण समारोह September 7, 2017 / September 7, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इस शीर्षक से आप भ्रमित न हों। मेरा मतलब पिछले दिनों दिल्ली में हुए शपथ ग्रहण से नहीं है। उसमें कुछ मंत्रियों की कुर्सी ऊंची हुई, तो कुछ की नीची। कुछ की बदली, तो कुछ किस्मत के मारे उससे बेदखल ही कर दिये गये। एक पुरानी और प्रखर वक्ता ने जब अपने शरीर का भार […] Read more » शपथ ग्रहण समारोह