लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48 January 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान आत्र्त-जिज्ञासु भजें अर्थार्थी दिन रात। युक्तात्मा ज्ञानी भजै उसकी अनोखी बात।। श्रीकृष्ण दूसरे प्रकार के भक्त का नाम जिज्ञासु बताते हैं। जिज्ञासु का अर्थ है-जानने की इच्छा रखने वाला। यह भक्त अपना ज्ञानवद्र्घन करने के लिए मेधा की […] Read more » Featured karmayoga of geeta todays world आज का विश्व ईश्वर का ध्यान गीता गीता का कर्मयोग गीता का सातवां अध्याय ज्ञान-विज्ञान विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47 January 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज आज के संसार में प्रकृतिवादी लोग ऐसी ही मानसिकता और सोच रखते हैं। प्रकृतिवादी नास्तिक बन गये हैं। उन्हें प्रकृति से आगे ईश्वर के होने की बात स्वीकार ही नहीं है। वे मानते हैं कि ये प्रकृति ही सब कुछ है और यह […] Read more »  गीता का सातवां अध्याय Featured karmayoga of geeta todays world आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग विश्व समाज
व्यंग्य साहित्य चंद्र धरा दिनकर का लुकाछिपी महोत्सव January 31, 2018 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल आर गाँधी आज विश्व के अर्वाचीन अलौकिक प्रेमियों का क्षितिज में लुकाछिपी महोत्सव है …….. अनंतकाल से धरा अपने प्रेमी दिनकर की परिक्रमा में नृत्य निमंगम ….. दिन रात अपने प्रियतम की ग्रीषम किरणों से ऊर्जा प्राप्त कर उसे नुहारती और निहारती है ….दिनकर भी अपनी इस अलौकिक प्रेमिका को अपनी किरणों के बाहुपाश में जकड कर […] Read more » lunar eclipse चंद्र दिनकर धरा लुकाछिपी महोत्सव
व्यंग्य साहित्य ग्रीन शासन, क्लीन प्रशासन January 30, 2018 by अशोक गौतम | Leave a Comment अबके दीवाली को जब कसौली के साथ लगते गांव का गंगा कुम्हार अपने गोरू गधे की पीठ पर दीवाली के दीए लाद कालका के बाजार में बेचने गया था तो दीए आढ़ती को बेचने के बाद खुद कालका का बाजार घूमने, घर का जरूरी सामान लेने गधे ये यह कह बाजार हो लिया कि वह […] Read more » Featured क्लीन प्रशासन ग्रीन शासन
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-46 January 30, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज महर्षि पतंजलि ‘योग दर्शन’ में कहते हैं कि संसार और शरीर आदि के अनित्य पदार्थों को नित्य, मिथ्या-भाषण, चोरी आदि अपवित्र कर्मों को पवित्र, विषय सेवन आदि दु:ख को सुख रूप, शरीर और भौतिक जड़ पदार्थों को चेतन समझना यह अविद्या है। अनित्य […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व ईश्वर का ध्यान गीता गीता का कर्मयोग गीता का सातवां अध्याय ज्ञान-विज्ञान विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-45 January 30, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान गीता के सातवें अध्याय का शुभारम्भ करते हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि हे पार्थ! मुझ में मन को आसक्त करके अर्थात कर्मफल की आसक्ति के भाव को छोडक़र और संसार के भोगों या विषय वासनाओं को […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व ईश्वर का ध्यान गीता गीता का कर्मयोग गीता का सातवां अध्याय ज्ञान-विज्ञान विश्व समाज
लेख विविधा साहित्य संघ मेरी आत्मा – श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की आत्मकथा के अंश January 30, 2018 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मेरा प्रथम संपर्क 1 9 3 9 में हुआ और वह भी आर्य समाज की युवा शाखा, आर्य कुमार सभा के माध्यम से | उन दिनों ग्वालियर रियासत थी, जो किसी भी प्रांत का हिस्सा नहीं थी। एक कट्टर ‘सनातती’ परिवार से होने के बाद भी मैं आर्य कुमार सभा के […] Read more » Featured RSS my soul श्री अटल बिहारी वाजपेयी श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की आत्मकथा के अंश संघ मेरी आत्मा
व्यंग्य साहित्य थानेदार मुर्गा January 29, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment इस शीर्षक को पढ़कर मुर्गा नाराज होगा या थानेदार, ये कहना कठिन है; पर कुछ घटनाएं पढ़ और सुनकर लग रहा है कि भविष्य में ऐसे दृश्य भी दिखायी दे सकते हैं। असल में पिछले दिनों म.प्र. के बैतूल नगर में एक अजीब घटना हुई। वहां दो लोग मुर्गे लड़ा रहे थे। भीड़ देखकर पुलिस […] Read more » Featured मुर्गा
कविता साहित्य तुम याद आये January 28, 2018 / January 30, 2018 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment जब हवाओं का रुख मेरी तरफ हुआ उड़ते गुलाल ने आसमान को छुआ तब तुम याद आये , हल्की तपती दोपहरी में कोयल ने कोई गीत सुनायी सरसों की फूलों ने भ्रमर को पास बुलयी तब तुम याद आये, स्वच्छ चांदनी रातों में तारे टिमटिमाने लगे सरोवर की झिलमिलाती चंद्र छाया में किसी आभा समाने […] Read more » Featured तुम याद आये
व्यंग्य वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !! January 28, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा वाकई इस दुनिया में पग – पग पर कंफ्यूजन है। कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब तो मिलते नहीं अलबत्ता वे मानवीय कौतूहल को और बढ़ाते रहते हैं।हैरानी होती है जब चुनावी सभाओं में राजनेता हर उस स्थान से अपनापन जाहिर करते हैं जहां चुनाव हो रहा होता है। चुनावी मौसम […] Read more » Featured
व्यंग्य अभी थोड़ा बिजी हूँ! January 26, 2018 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अमित शर्मा (CA) मैं अक्सर व्यस्त रहता हूँ। यह मेरी आसाधारण प्रतिभा ही है कि व्यस्त रहते हुए भी मैं फेसबुक, वाट्सएप और कई लोगो के दिल में बिना किराए और रेंट एग्रीमेंट के रह लेता हूँ। व्यस्तता के प्रकोप से पीड़ित होने के बावजूद भी, मैं एक अच्छे सेवक की तरह भोजन और नींद […] Read more » busy Featured व्यस्त
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-44 January 24, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का छठा अध्याय और विश्व समाज अच्छे बुद्घिमानों का और पवित्रात्माओं का परिवार ऐसे ही योगभ्रष्ट लोगों को एक पुरस्कार के रूप में मिलता है। जिनके संसर्ग, सम्पर्क और सान्निध्य में रहकर वह योगभ्रष्ट व्यक्ति या योगी शीघ्र ही आगे बढऩा आरम्भ कर देता है। वह पूर्व जन्म के […] Read more » Featured geeta karmayog of Geeta karmayoga of geeta todays world आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का छठा अध्याय विश्व समाज