जन-जागरण विधि-कानून विविधा राज का विकास, पंचायती का ह्यस सुधार जरूरी November 26, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment पंचायती राज आईने मंे अक्स देखने का वक्त या राज का विकास, पंचायती का ह्यस सुधार जरूरी अपने नये पंचायती राज की उम्र 22 साल, सात महीने से कुछ दिन अधिक की ही हो गई है। आगे की दिशा निश्चित करने के लिए जरूरी है कि पंचायती राज के अभिभावक, आकलन करें। बतौर मानक, तीन […] Read more » Featured पंचायती का ह्यस सुधार जरूरी
विधि-कानून विविधा अदालतों को मेरे सिर्फ दो सुझाव November 7, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ.वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के बीच आजकल युद्ध छिड़ा हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की नियुक्ति में पूर्ण स्वतंत्रता चाहता है। इसी संदर्भ को उसने ज़रा व्यापक कर दिया है। उसने देश के विधि विशेषज्ञों, जजों, वकीलों, सांसदों और प्रबुद्धजन से तो सुझाव मांगे ही हैं, साधारण लोगों से भी पूछा है कि […] Read more » अदालतों को मेरे सिर्फ दो सुझाव दो सुझाव
विधि-कानून समाज सार्थक पहल तीस वर्षो बाद देश की लाखों ‘शाहबानों’ को मिलेगा इंसाफ October 29, 2015 by संजय सक्सेना | Leave a Comment संजय सक्सेना हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी अदालत एक बार फिर कट्टरपंथियों की परवाह न करते हुए जनहित याचिका के माध्यम से तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिये कमर कस रहा है। धार्मिक रूढ़िवादी मान्यताओं से परे हट कर सुप्रीम कोर्ट ने मनमर्जी के तलाक, पहली पत्नी के रहते पति के दूसरी शादी […] Read more » Featured तीस वर्षो बाद देश की लाखों ‘शाहबानों’ को मिलेगा इंसाफ
विधि-कानून विविधा न्यायपालिका की तानाशाही October 27, 2015 / October 28, 2015 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी सरकार के ‘‘न्यायिक नियुक्ति आयोग’’ को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि संविधान द्वारा न्यायपालिका को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है और एनजेएसी एक्ट से इस अधिकार मे […] Read more » Featured न्यायपालिका की तानाशाही
विधि-कानून विविधा सामाजिक न्याय और न्यायपालिका की भूमिका October 27, 2015 / October 28, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान इतिहास गवाह है कि अनेकों शताब्दियां बीत गईं लेकिन मानव सामाजिक न्याय को प्राप्त करने भटकता रहा है और इसी कारण दुनिया में कई युद्ध, क्रांति, बगावत, विद्रोह, हुये हैं जिसके कारण अनेक बार सत्ता परिवर्तन हुए हैं। अगर भारत की बात की जाये तो हमारा भारतीय समाज पहले वर्ण व्यवस्था आधारित था […] Read more » Featured न्यायपालिका की भूमिका सामाजिक न्याय
राजनीति विधि-कानून समान नागरिक संहिता के पेंच ? October 21, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः- समान नागरिक संहिता पर सर्वोच्च न्यायालय का राजग सरकार को निर्देश- सर्वोच्च न्यायलय ने एक बार फिर चिंता जताई है कि ‘समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार का क्या रुख है। अपनी स्पष्ट राय तीन सप्ताह के भीतर न्यायालय के सामने रखे।‘ दरअसल संविधान में दर्ज नीति-निर्देशक सिद्धांत भी […] Read more » Featured समान नागरिक संहिता समान नागरिक संहिता के पेंच ?
राजनीति विधि-कानून न्यायिक नियुक्ति आयोग की गुत्थी October 19, 2015 by पियूष द्विवेदी 'भारत' | Leave a Comment पीयूष द्विवेदी सभी राजनीतिक दलों द्वारा संसद में एकसुर से पारित किए गए ‘राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग-२०१४’ (एनजेएसी) क़ानून को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय द्वारा इस क़ानून को असंवैधानिक बताते हुए न केवल निरस्त किया गया बल्कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की पुरानी कोलेजियम व्यवस्था को पुनः […] Read more » Featured कोलेजियम व्यवस्था न्यायिक नियुक्ति न्यायिक नियुक्ति आयोग राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग
राजनीति विधि-कानून लोकतांत्रिक स्तंभों में टकराव October 19, 2015 by आदर्श तिवारी | Leave a Comment सुप्रीम कोर्ट नेशुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय न्यायिक न्युक्ति आयोग को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है तथा इससे संबंधित अधिनियम को भी रदद् कर दिया.केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की न्युक्ति और तबादले के लिए राष्ट्रीय न्यायिक न्युक्ति आयोग एक्ट का गठन किया […] Read more » Featured लोकतांत्रिक स्तंभों में टकराव
विधि-कानून विविधा संविधान की हुई जीत। October 17, 2015 / October 17, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment बी. आर. कौण्डल सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक ठहरा कर यह साबित कर दिया कि इस देश में संविधान सर्वोपरि है न की विधायिका। भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रावधान किया गया है जिसकी सुरक्षा करना न्यायपालिका का धर्म है। हाल के फैसले में उच्चतम न्यायालय ने उस धर्म […] Read more » Featured संविधान
विधि-कानून विविधा सीबीआई की मिट्टी पलीत के बाद क्या? October 17, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment हमारे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जैसी मिट्टी अभी पलीत हुई है, वैसी पहले कभी नहीं हुई। एक विशेष अदालत ने फैसला दिया है कि इस ब्यूरो के उस अधिकारी की जांच होनी चाहिए, जिसने टेलिकॉम सचिव श्यामल घोष और तीन टेलिकॉम कंपनियों के विरुद्ध झूठा आरोप-पत्र बनाया और उन्हें किसी के इशारे पर बदनाम […] Read more » Featured सीबीआई की मिट्टी पलीत सीबीआई की मिट्टी पलीत के बाद क्या?
राजनीति विधि-कानून सबके कल्याण की संहिता October 15, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि वह देश के सभी नागरिकों के लिए समान आचार संहिता कब बनाएगी। बनाएगी या नहीं? उसने यह इसलिए पूछा है कि संविधान के नीति−निर्देशक तत्वों में ऐसा कहा गया है। समान आचार संहिता की मांग सिर्फ भाजपा करती है। अन्य कोई राजनीतिक दल नहीं […] Read more » Featured uniform civil code सबके कल्याण की संहिता
विधि-कानून विविधा आत्मदाह के प्रयास को गैर-आपराधिक बनाने का निर्णय October 3, 2015 / October 3, 2015 by वीरेश्वर तोमर | Leave a Comment वीरेश्वर तोमर अंततः केन्द्र सरकार ने आत्महत्या को गैर -आपराधिक बनाने का निर्णय विचाराधीन कर ही लिया| यह विधि आयोग की 210वीं रिपोर्ट (वर्ष 2014) के आधार पर किया गया| अतः भारतीय दंड संहिता की धारा 309 को हटा दिया जायेगा, जो आत्महत्या का प्रयास करने वाले को अपराधी मानते हुए एक वर्ष के कारावास […] Read more » Featured आत्मदाह